असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को मणिपुर में 2017 तक के कार्यकाल को लेकर कांग्रेस और यूपीए पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मणिपुर के जातीय संघर्षों का कारण पिछली कांग्रेस सरकारों की दोषपूर्ण नीतियां हैं। इसके अलावा उन्होंने दोगलापन का भी आरोप लगाया।
मनमोहन सिंह पर निशाना
मणिपुर के सामाजिक ताने-बाने में हुआ सुधार
सरमा ने दावा किया कि 2014 के बाद से मणिपुर के सामाजिक ताने-बाने में जबरदस्त सुधार हुआ है। दशकों पुराने जातीय संघर्षों को सुलझाने की ये प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल्द पूरी होगी।
UPA सरकार में हर साल एक महीने तक नाकाबंदी
निजी कंपनियों को बचाने में थे व्यस्त
सरमा ने कहा कि 2011 मणिपुर में 120 दिनों से अधिक समय तक चलने वाली सबसे खराब नाकाबंदी में से एक थी। 2011 में जब मणिपुर जल रहा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री और यूपीए अध्यक्ष ने उन 123 दिनों में एक शब्द भी नहीं बोला। वह निजी कंपनियों को बचाने में व्यस्त थे।
पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों ने छुआ था आसमान
भाजपा नेता ने कहा कि प्रत्येक नाकाबंदी के दौरान पेट्रोल और एलपीजी की कीमतें 240 से 1,900 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई थीं। उन्होंने कहा कि सच यह है कि 2004-2014 के दौरान जब कांग्रेस देश और राज्य पर शासन कर रही थी, मणिपुर में 991 से अधिक नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। मई 2014 से अब तक, इस दुखद आंकड़े में 80 प्रतिशत की कमी आई है।
यह है मामला
मणिपुर में तीन मई से जातीय हिंसा भड़की हुई है। करीब ढाई महीने से जारी हिंसा में 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, कई लोग घायल हैं। दरअसल, मेइतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति (एसटी) की मांग कर रहा है, इस वजह से कुकी और मेइतेई समाज आपस में भिड़ गया है। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।