मणिपुर के सीएम एन. बीरेन सिंह
- फोटो : ANI
मणिपुर सरकार ने राज्य पुलिस को पश्चिमी इंफाल जिले की सीमा से लगे इलाकों में तलाशी अभियान चलाने के आदेश दिए। दरअसल, इसी इलाके में उग्रवादियों के हमले में दो की मौत हो गई थी, जबकि नौ घायल हुए थे। आयुक्त (गृह) एन. अशोक कुमार ने पुलिस महानिदेशक से बंदुक और बम हमले में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए उचित कदम उठाने को कहा। इसके साथ ही इलाके में इस तरह की घटना रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की भी अपील की।
आयुक्त ने डीजीपी को एक चिट्ठी में कहा, "पश्चिमी इंफाल जिले की सीमा से लगे इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने वाली घटनाओं के देखते हुए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि विशेषकर कीथेल्मनबी से कौट्रुक तक के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाने और स्वच्छता के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।" बता दें कि कांगपोकपी जिले के कीथेल्मनबी से पश्चिमी इंफाल जिले कौट्रुक की दूरी 32 किमी है।
पहाड़ी चोटी से निचले इलाकों में गोलीबारी की गई
पुलिस ने बताया कि उग्रवादियों ने पहाड़ी चोटियों से कौट्रुक के निचले घाटी इलाकों और कडांगबैंड में रविवार को अंधाधुंध गोलीबारी की। इस गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ लोग घायल हो गए। इस दौरान कई घर भी क्षतिग्रस्त हुए। पुलिस ने दावा किया कि इस हमले में रॉकेट से चलाए जाने वाले ग्रेनेड और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले को लेकर एक अधिकारी ने बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, "पश्चिम इंफाल के कौट्रुक में किए गए हमले में उग्रवादियों ने उच्च तकनीक वाले ड्रौन का उपयोग कर कई आरपीजी तैनात किए।"
अधिकारी ने कहा, "मणिपुर में दो गुट निगरानी और उग्रवादियों की गतिविधियों की पहचान के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाता है। रविवार को स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों पर निशाना साधने के लिए ड्रोन के जरिए विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया, जो कि राज्य के लोगों के लिए नया था।" पुलिस ने बताया कि ड्रोन से कम से कम पांच बम गिराए गए।
मणिपुर में डेढ़ साल से हिंसा जारी
बता दें कि मणिपुर में पिछले डेढ़ साल से ही हिंसा जारी है। दरअसल, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में पिछले साल तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।