जिरीबाम में हिंसा को लेकर पुलिस का खुलासा (सांकेतिक तस्वीर)
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मणिपुर के जिरिबाम जिले में हुई हिंसा को लेकर मणिपुर पुलिस ने अपनी रिपोर्ट साझा की है। पुलिस के अनुसार काफी दूर से आए तीन कुकी विद्रोहियों और अन्य शख्स ने हमले की शुरुआत की थी। बता दें कि जिरिबाम जिले में पिछले महीने मैतेई और हमार नेताओं ने सुरक्षा बलों के कमांडरों के साथ शांति वार्ता के लिए मुलाकात की थी। मणिपुर के ही कांगकोपी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के शिविर पर हमले के मामले में डीआईजी मनीष कुमार सच्चर ने कहा, हमला चौंकाने वाला था। हालांकि, मुस्तैद सुरक्षाबलों ने हमलावरों के मंसूबे पर पानी फेर दिया। घटना शाम 7:30 बजे हुई जो 'सुनियोजित हमला' था। सच्चर ने कहा कि सीआरपीएफ 'मणिपुर के मुद्दे को सुलझाने और शांति लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पुलिस ने की बरामद शवों की पहचान
वहीं पुलिस ने अपने बयान में कहा कि हिंसा के बाद मौके से मिले शवों में से तीन की पहचान चुराचांदपुर जिले के कुकी विद्रोहियों के रूप में हुई है, चौथे शख्स की पहचान जिरिबाम के कुकी स्वयंसेवक के रूप में हुई है, जबकि पांचवें शख्स की पहचान मैतेई विद्रोही समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (पंबेई) या यूएनएलएफ (पी) के सदस्य के रूप में हुई है।
काफी दूर से आए होंगे हमलावर- पुलिस
पुलिस ने बताया कि तीनों कुकी विद्रोही कुकी लिबरेशन आर्मी (केएलए) के सदस्य थे। पुलिस को संदेह है कि तीनों कुकी विद्रोही दक्षिणी मणिपुर के पहाड़ी जिले चुराचांदपुर से आए होंगे, जो जिरिबाम जिले से करीब 230 किलोमीटर दूर है। पुलिस के अनुसार, तीन केएलए विद्रोही सेमिनलेन खोंगसाई, हाओगौलेन डोंगेल और नेहबोइथांग हाओकिप थे। मारा गया स्वयंसेवक लहुंखोहाओ हाओकिप था। यूएनएलएफ (पी) सदस्य बासपतिमयुम लखी कुमार शर्मा था। वह स्वयंसेवक के रूप में एक गांव की रखवाली कर रहा था।
पुलिस ने बताया कि तीन कुकी विद्रोहियों और स्वयंसेवक ने जिरीबाम में हमले की शुरुआत की, जिसमें मैतेई समुदाय के बुजुर्ग व्यक्ति की हत्या कर दी गई, जिसकी पहचान युरेम्बम कुलेंद्र सिंह के रूप में की गई। पुलिस ने बताया कि हमले की जगह पर पहुंची पुलिस टीम पर गोलीबारी की गई, टीम ने जवाबी कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रित किया।
मणिपुर में विद्रोही समूहों की स्थिति
बता दें कि यूएनएलएफ सबसे पुराना मैतेई विद्रोही समूह है, जो बाद में दो गुटों में टूट गया; पंबेई गुट ने नवंबर 2023 में केंद्र और राज्य सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। जबकि केएलए के दो गुट हैं, जिनमें से एक दो छाता कुकी-जो समूहों के साथ है, जिन्होंने राज्य सरकार और केंद्र के साथ विवादास्पद त्रिपक्षीय संचालन निलंबन (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।