गृह मंत्रालय की पहल पर मणिपुर में शांति बहाली के लिए 17 महीने बाद मैतेई, जो-हमार, कुकी और नगा समुदाय के करीब 20 विधायकों ने पहली बार राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को बैठक की। गृह मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में सर्वसम्मति से राज्य के सभी समुदायों के लोगों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील करने का निर्णय लिया गया, ताकि निर्दोष नागरिकों की कीमती जान और न जाए। गौरतलब है, जातीय हिंसा में अब तक 220 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है।
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान ढूंढ़ने के लिए करीब दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में भाजपा के सांसद संबित पात्रा और नगा समुदाय के तीन विधायक भी मौजूद रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह मंत्रालय के वार्ताकार एके मिश्र और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह इस बैठक में नहीं थे। इससे पहले, गृह मंत्री शाह ने 17 जून की समीक्षा बैठक में राज्य में शांति बहाली के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाने और दोनों समुदायों से बातचीत करने पर जोर दिया था।
विस अध्यक्ष थोकचोम ने किया मैतेई समुदाय का प्रतिनिधित्व
मैतई समुदाय का प्रतिनिधित्व विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यब्रत सिंह, विधायक थोंगम बसंतकुमार सिंह और तोंगब्राम रबिन्द्रो ने किया, जबकि कुकी समुदाय की ओर से लेतपाओ हाओकिप और नेमचा किपगेन शामिल हुए। नगा समुदाय का प्रतिनिधित्व विधायक राम मुइवा, अवांगबो न्यूमई और एल दिखो ने किया।
मैतेई और कुकी विधायकों ने दोनों समुदायों की पीड़ा को सामने रखा
3 मई, 2023 के बाद यह पहली बार था कि मैतेई और कुकी विधायक एक ही कमरे में थे। कुकी के 10 विधायकों में से किसी ने भी पिछले डेढ़ साल में मैतेई बहुल इंफाल घाटी और राज्य की राजधानी इंफाल में कदम नहीं रखा। वे तब से आयोजित सभी विधानसभा सत्रों में भी अनुपस्थित रहे। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने दोनों समुदायों के विचारों, शिकायतों और लंबी उथल-पुथल के दौरान उनकी पीड़ा को सामने रखा। विधायकों ने आगे की रणनीति और आने वाले दिनों में क्या करना है, इस पर भी चर्चा की, लेकिन कुछ भी ठोस हासिल नहीं हो सका। विचार-विमर्श से जुड़े एक सूत्र ने कहा, यह एक अच्छी शुरुआत थी। हम पहली बैठक में किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं कर रहे थे, लेकिन यह एक उपलब्धि है कि हम दोनों समुदायों के विधायकों को एक ही छत के नीचे ला सके। हमें उम्मीद है कि वे निकट भविष्य में फिर से मिलेंगे, ताकि एक शांतिपूर्ण समाधान मिल सके।
16 महीने पहले जातीय हिंसा के कारण सुर्खियों में रहा मणिपुर
बता दें कि मणिपुर जातीय हिंसा के कारण लंबे समय तक अशांत रहा था। मई, 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बिगड़ते हालात को संभालने के लिए केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर सरकार के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इंफाल जाकर बैठकें की थीं।
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