मणिपुर में बीते 111 दिनों से जारी आर्थिक नाकेबंदी ने तमाम राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को अपनी चुनावी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। इस बार उनके चुनाव प्रचार में कारों के काफिले नजर नहीं आ रहे हैं। ज्यादातर दलों के प्रत्याशी पैदल या साइकिल से प्रचार कर रहे हैं।
राज्य में दो चरणों में चार और आठ मार्च को मतदान होने हैं। राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा सात नए जिलों के गठन के फैसले के खिलाफ यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने बीते पहली नवंबर से ही आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है। इससे राज्य में जरूरी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। पेट्रोल ढाई सौ रुपए लीटर तक बिक रहा है। ऐसे में प्रत्याशियों के सामने साइकिल के सिवा कोई और साधन नहीं है जिस पर वह प्रचार करें। कुछ प्रत्याशी तो पैदल ही लोगों के घर जा कर वोट मांग रहे हैं।
20 किलोमीटर साइकिल चला कर पर्चा दाखिल करने पहुंची थीं इरोम
पीपुल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस एलायंस (प्रजा) के बैनर तले मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खिलाफ मैदान में उतरी मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला भी साइकिल से ही चुनाव प्रचार कर रही हैं। अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए भी वह 20 किलोमीटर साइकिल चला कर पहुंची थीं। हालांकि उनके सामने धन की कमी जैसी समस्या नहीं है, लेकिन कांग्रेस, भाजपा और दूसरे स्थानीय दलों के उम्मीदवार भी चुनाव प्रचार के लिए साइकिल को तरजीह दे रहे हैं।