मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह
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मणिपुर पुलिस ने काकचिंग जिले से प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (यूपीपीके) के एक सदस्य को गिरफ्तार किया। एक अधिकारी ने रविवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उग्रवादी को शनिवार को काकचिंग के हियांगलम लाई पंगाम्बा इलाके से गिरफ्तार किया गया था। सुरक्षा बलों ने एक सिंगल-बोर बैरल (स्नाइपर), एक देशी राइफल, एक कार्बाइन मैगजीन, तीन .303 मैगजीन, एक हैंड ग्रेनेड, एक डेटोनेटर, गोला-बारूद और अन्य सामान जब्त किया।
कांगपोकपी में अवैध पोस्ता की खेती को किया गया नष्ट
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में पुलिस और सीआरपीएफ की टीमों ने 25 एकड़ की अवैध पोस्ता की खेती को नष्ट कर दिया। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ड्रग्स के खिलाफ युद्ध पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, कांगपोकपी जिला पुलिस और 133 बीएन सीआरपीएफ की दो प्लाटून की एक संयुक्त टीम ने कांगपोकपी के वाई लैंगखोंग गांव में एक विशेष अभियान के दौरान 25 एकड़ में लगी अफीम की खेती को नष्ट कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के अभियान नशीली दवाओं के खतरे से निपटने में महत्वपूर्ण हैं।
मणिपुर सरकार ने की सोमवार को आधी छुट्टी की घोषणा
मणिपुर सरकार ने विधायक एन. काइसी के सम्मान में सोमवार को आधी छुट्टी की घोषणा की। दरअसल, लंबी बीमारी के बाद काइसी शनिवार को निधन हो गया। 58 काइसी सेनापति जिले के तादुबी के विधायक थे। मणिपुर के राज्यपाल ने (दिवंगत) एन काइसी के सम्मान में मणिपुर सरकार के अधीन सभी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए 20 जनवरी 2025 को दोपहर एक बजे से आधी छुट्टी की घोषणा की। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने भी काइसी के निधन पर शोक व्यक्त किया।
मणिपुर में जारी है तनाव
बता दें कि मणिपुर में 2023 से ही हिंसा जारी है, जिसके कारण पूरे राज्य में तनावपूर्ण स्थिति है। मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी समुदाय के बीच हिंसा तीन मई 2023 को उस समय शुरू हुई थी जब मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ आदिवासी छात्रों संघ (ATSUM) ने एक रैली आयोजित की थी, जिसमें मणिपुरी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद से राज्य में हिंसा का सिलसिला जारी है, और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा।