मणिपुर के आरआईएमएस अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने हंगामा किया, तोड़फोड़ की और डॉक्टर पर हमला कर दिया। घटना के बाद डॉक्टरों के संगठन ने ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दीं। अस्पताल ने महिला की मौत पर दुख जताया और मामले की जांच का भरोसा दिया। प्रशासन ने हिंसा की निंदा करते हुए इसे अवैध करार दिया और समाज से शांति बनाए रखने की अपील की।
मणिपुर की राजधानी इंफाल में स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस) में रविवार को एक महिला की मौत के बाद बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। महिला के परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की और एक डॉक्टर पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद डॉक्टरों के संगठन ने तत्काल प्रभाव से ओपीडी और इमरजेंसी सहित सभी सेवाएं बंद कर दीं।
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जानकारी के मुताबिक 35 वर्षीय महिला की एक बच्ची के जन्म के बाद जटिलताओं के चलते मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि आरआईएमएस के डॉक्टरों की लापरवाही के कारण यह मौत हुई। मौत की खबर मिलते ही परिवारजन गुस्से में आ गए और उन्होंने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते महिला के मोहल्ले के कई लोग भी वहां पहुंच गए और उन्होंने डॉक्टर पर हमला कर दिया।
अस्पताल की प्रतिक्रिया
अस्पताल प्रबंधन ने महिला की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गहरा दुख जताया। साथ ही परिजनों को भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी और उनकी शिकायतों का समाधान किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने हमले और तोड़फोड़ की निंदा करते हुए कहा कि यह कृत्य न केवल गैरकानूनी है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित भी करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की हिंसा कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित कर सकती है।
डॉक्टरों का कड़ा रुख
शिक्षक और मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (TAMOA) ने घटना की निंदा की और “झूठे आरोपों” व शारीरिक हमले पर नाराजगी जताई। संगठन ने साफ कर दिया कि जब तक डॉक्टर पर हमला करने वालों की गिरफ्तारी नहीं होगी और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तब तक ओपीडी, इमरजेंसी और रूटीन ऑपरेशन पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि एसोसिएशन ने यह भी कहा कि जो मरीज पहले से भर्ती हैं, उनका इलाज जारी रहेगा।
कानूनी और सामाजिक पहलू
आरआईएमएस प्रशासन ने समाज से शांति बनाए रखने और सार्वजनिक संस्थानों का सम्मान करने की अपील की। बयान में कहा गया कि डॉक्टरों पर हाथ उठाना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध है। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं बल्कि यह पूरे समाज के लिए हानिकारक है। अस्पताल ने लोगों से आग्रह किया कि वे उचित कानूनी और प्रशासनिक माध्यम से अपनी शिकायतों का समाधान कराएं।
घटना के बाद पूरे इलाके में गुस्से का माहौल है। परिजनों और स्थानीय निवासियों ने अस्पताल से जवाबदेही की मांग की है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं के रुकने से आम मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य ढांचे पर गहरा असर डालती हैं और डॉक्टरों में भय का माहौल पैदा करती हैं।