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Manipur Violence: विस्थापित लोगों के लिए 3000 पूर्वनिर्मित घर बना रही मणिपुर सरकार; जानें कैसे होंगे ये आवास

Tue, 15 Aug 2023 06:49 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल

सार

मणिपुर में इस तरह के घर कई अन्य जिलों में बनाए जा रहे है। थौबल जिले के यैथिबी लौकोल क्षेत्र में भी कम से कम 400 परिवारों के लिए पूर्वनिर्मित घर बनाए जा रहे हैं। साथ ही बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा में भी 120 परिवारों के लिए पूर्वनिर्मित घर बनाए जा रहे हैं। ऐसे ही इंफाल पश्चिम जिले के सेकमाई और इंफाल पूर्व के सॉओमबुंग में भी बनाए जा रहे हैं।
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मणिपुर हिंसा - फोटो : ANI
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विस्तार
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मणिपुर में जारी हिंसा हाल-फिलहाल में थमती नहीं दिख रही। इस हिंसा के कारण बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन भी हुआ है। कुकी और मैतई के बीच जारी हिंसा से प्रभावित कई लोग तीन महीने से अधिक समय से अस्थायी राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। मणिपुर सरकार इन विस्थापित हुए 3000 परिवारों को आश्रय देने के लिए पूर्वनिर्मित घरों के पहले बैच को समय से पूरा करने के लिए काम कर रही है, ताकि उन लोगों को घर दिया जा सके। 

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20 अगस्त तक पूरा करना है घरों का काम
इस परियोजना के बारे में मणिपुर पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता पी ब्रोजेंड्रो ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विस्थापित लोगों के लिए 26 जून से पांच अलग-अलग स्थानों पर पूर्वनिर्मित घरों का काम शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की इस पहल को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंफाल पूर्वी जिले में सजीवा जेल के पास बनाए जा रहे 200 घर पूरे होने वाले हैं। इन प्रत्येक घर में दो कमरे और एक शौचालय होगा और सामान्य रसोई होगी। एक-एक पंक्ति में दस-दर घर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन 200 घरों को पूरा करने के लिए 160 मजदूर काम कर रहे हैं। इन्हें 20 अगस्त तक पूरा करना है।
 
अधीक्षण अभियंता पी ब्रोजेंड्रो ने इन घरों को बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन घरों का निर्माण में दीवारों के लिए पफ पैनल, खिड़कियों के लिए पाउडर-लेपित एल्यूमीनियम फ्रेम और छतों के लिए प्री-पेंटेड सीआई शीट शामिल हैं। 
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इन जिलों में भी बनाए जा रहे पूर्वनिर्मित घर
बता दें कि मणिपुर में इस तरह के घर कई अन्य जिलों में बनाए जा रहा है। थौबल जिले के यैथिबी लौकोल क्षेत्र में भी कम से कम 400 परिवारों के लिए पूर्वनिर्मित घर बनाए जा रहे हैं। साथ ही बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा में भी 120 परिवारों के लिए पूर्वनिर्मित घर बनाए जा रहे हैं। ऐसे ही इंफाल पश्चिम जिले के सेकमाई और इंफाल पूर्व के सॉओमबुंग में भी बनाए जा रहे हैं।

हिंसा का पड़ रहा असर
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में जारी हिंसा के कारण इन घरों के निर्माण पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया खास तौर पर क्वाक्टा में अज्ञात लोगों और राज्य पुलिस के बीच लगातार गोलीबारी के कारण मकानों के निर्माण कार्य में रुकावटें आ रही हैं। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण वहां परियोजना को लागू करना मुश्किल हो गया है। 

पुराने घरों में जाना चाह रहे विस्थापित लोग
वहीं, विस्थापित लोग पूर्वनिर्मित घरों में जाने के बजाय अपने पुराने घरों में लौटना चाह रहे हैं। इंफाल पूर्वी जिले के एक राहत शिविर में रहने वाले किशोरजीत पी ने कहा कि मैं पूर्वनिर्मित घरों में नहीं जाऊंगा। मैं चुराचांदपुर लौटना चाहता हूं जहां से हमें भागना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म और पालन-पोषण चुराचांदपुर में हुआ और मुझे अपने पैतृक स्थान से भावनात्मक लगाव है।

मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। इनमें से कुछ लोग पड़ोसी राज्यों में शरण भी ले रहे हैं।  

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