हिंसाग्रस्त मणिपुर से आतंकवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के चार संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक, चार कैडरों से एक 51 मिमी मोर्टार, एक कार्मिक-विरोधी बम बरामद किया गया। खुफिया सूचनाओं पर कार्रवाई करते हुए 19 जून की रात को पुलिस स्टेशन लिलोंग के पास एक मोबाइल वाहन चेक पोस्ट बनाया गया। दो अलग-अलग वाहनों में चार संदिग्ध कैडरों को एक 51 मिमी मोर्टार के साथ गिरफ्तार किया गया। बताया गया है कि चारों को पुलिस को सौंप दिया गया।
इससे पहले मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सोमवार को विद्रोहियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तुरंत हिंसा रोकें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। हिंसा किसी भी रूप में बर्दास्त नहीं किया जाएगा। वे जल्द ही सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर रिव्यू मीटिंग करेंगे। हिंसाग्रस्त मणिपुर के मुख्यमंत्री ने पहली बार विद्रोहियों को इस तरह की चेतावनी दी है। वे रविवार रात पश्चिम इंफाल जिले में उपद्रवियों की ओर से अचानक की गई फायरिंग में एक जवान के घायल होने पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
इंटरनेट बैन 25 जून तक बढ़ाया गया
मणिपुर में मंगलवार को एक बार फिर सरकार ने इंटरनेट पर प्रतिबंध पांच दिन और बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने शांति में और गड़बड़ी को रोकने के प्रयास में इंटरनेट पर प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से पांच दिनों के लिए 25 जून तक बढ़ा दिया है। राज्य में जारी अशांति को देखते हुए डेटा सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में मेइती को शामिल करने की मांग के विरोध में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (एटीएसयू) द्वारा आयोजित एक रैली के दौरान हुई झड़प के बाद 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़क गई थी।
मणिपुर में रथ यात्रा महोत्सव, भक्तों ने की शांति की प्रार्थना
मणिपुर में मंगलवार को एक अलग ही माहौल देखने को मिला। यह निश्चित ही निराशा में डूबे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण की तरह थी। यहां पर भगवान जगन्नाथ के सैकड़ों भक्तों ने 'रथ यात्रा' के उत्सव पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान भक्तों ने मणिपुर में शांति और सद्भाव के प्रसार के लिए प्रार्थना की। इस दौरान भक्त पैलेस कंपाउंड स्थित गोविंदजी मंदिर में एकत्रित हुए और पूजा अर्चना की। मणिपुर में चल रहे संकट के कारण रथ यात्रा उत्सव को उस भव्यता के साथ नहीं मनाया गया। रथ यात्रा के दौरान केवल पूजा-अर्चना की गई, रथ को खींचा नहीं गया।