मणिपुर में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी भक्त चरण दास ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाने पर लिया। दास ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अफ्स्पा (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) को संगठित हिंसा कानून में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में इस कानून को निरस्त करने की मांग एक बड़ा मुद्दा है लेकिन भाजपा लोगों के विचारों का सम्मान नहीं कर रही है।
कांग्रेस ने भाजपा की अपने चुनावी घोषणापत्र में इस कानून पर मौन रहने के लिए आलोचना की है और वादा किया है कि अगर हम राज्य में विधानसभा चुनाव जीतते हैं तो इस कानून को निरस्त करने के लिए कदम उठाएंगे। कांग्रेस प्रभारी ने विश्वास जताया कि प्रदेश में इस बार पार्टी की ही सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस पार्टी 35 से 40 सीटों पर जीत हासिल करेगी।
दास ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी चेहरे का एलान करने से हमारे प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह समेत कई नेता हैं। दास ने दावा किया कि जनता के बीच मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर इस समय बहुत मजबूत है। उनकी सरकार अपना एक भी चुनावी वादा पूरा करने में पूरी तरह से असफल रही है।
उन्होंने कहा कि 'यह (मणिपुर) कांग्रेस की मानसिकता वाला राज्य है। यहां लगातार तीन बार कांग्रेस की सरकार रही है। इससे पता चलता है कि यहां कांग्रेस की नींव मजबूत है। दास ने कहा कि भाजपा मणिपुर में जनादेश से सत्ता में नहीं आई, बल्कि एक तरह का प्रबंधन करके उसने सत्ता प्राप्त की और अब भी अवैध रूप से यहां की सत्ता में बनी हुई है।
अफ्स्पा को लेकर दास ने कहा कि यह पूरे पूर्वोत्तर में एक बहुत बड़ा मुद्दा है। खासतौर से नगालैंड की घटना के बाद इसका विरोध बढ़ा है, जिसमें कई नागरिक मारे गए थे। उन्होंने कहा कि साफ तौर परअफ्स्पा का दुरुपयोग था। वह नगालैंड की उस घटना के बारे में बात कर रहे थे जिसमें सैन्य बलों की गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत हो गई थी। मणिपुर में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 28 फरवरी और पांच मार्च को होंगे। मतगणना 10 मार्च को होगी।