मारू ने राजकोट नगर निगम के अग्निशमन विभाग का कार्यभार तब संभाला था, जब तत्कालीन सीएफओ इलेश खेर को 25 मई को टीआरपी गेम जोन में आग लगने की घटना के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इस घटना में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
गुजरात में राजकोट नगर निगम (आरएमसी) के प्रभारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) को सोमवार को कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन पर 1.80 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि प्रभारी सीएफओ अनिल मारू ने एक इमारत को अपने विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने के लिए कथित तौर पर रिश्वत मांगी थी।
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मारू ने राजकोट नगर निगम के अग्निशमन विभाग का कार्यभार तब संभाला था, जब तत्कालीन सीएफओ इलेश खेर को 25 मई को टीआरपी गेम जोन में आग लगने की घटना के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इस घटना में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
एसीबी के मुताबिक, अग्नि सुरक्षा फिटिंग कार्य के दौरान शिकायतकर्ता ने जब एक इमारत के लिए अग्नि संबंधी एनओसी जारी करने को लेकर अधिकारी से संपर्क किया, तो आरोपी ने तीन लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने उसे 1.20 लाख रुपये का भुगतान किया और कहा कि वह शेष राशि चार-पांच दिन में दे देगा। शिकायतकर्ता ने जामनगर में एसीबी से संपर्क किया। आरोपी को लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 1.80 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
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टीआरपी गेम जोन में आग की घटना के बाद, आरएमसी के अग्निशमन विभाग की कड़ी आलोचना हुई थी। पाया गया था कि गेम जोन को बिना एनओसी के संचालित किया जा रहा था। खेर और उप सीएफओ भीखा थेबा को आग की घटना की जांच के बीच जून में गिरफ्तार किया गया था।