मेरठ के मिर्जापुर खादर गांव में मारपीट में घायल एक फरियादी की थाने और अस्पताल के चक्कर में जान चली गई। परिजनों आरोप है कि उन्हें मवाना सीएचसी से बिना इलाज के लौटा दिया गया। वे घायल को लेकर थाना परीक्षितगढ़ पहुंचे तो कार्रवाई के बजाय दो घंटे तक उन्हें बैठाए रखा गया।
इस बीच, इलाज के अभाव में घायल ने थाना परिसर में ही दम तोड़ दिया। उधर, मौत का शोर मचने पर हड़बड़ाई पुलिस शव को सीएचसी ले गई। वहां पुलिस और परिजनों के बीच हाथापाई हो गई। जमकर हंगामे के बीच पुलिस ने शव जबरन पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बवाल की आशंका देखते हुए कई थानों की पुलिस मौके पर बुलानी पड़ी।
कैराना, शामली के रामड़ा गांव निवासी अहसान (50) पुत्र कमरुद्दीन ने ग्राम मिर्जापुर में गंगा किनारे खादर में तरबूज के खेत ठेके पर ले रखे थे। वह परिवार के साथ वहीं रहकर देखरेख करता था। परिजनों के मुताबिक, 14 मई को अहसान के भांजे इमरान और उसकी पत्नी अनीशा के बीच विवाद हो गया था।
अनीशा के भाई महरुद्दीन, इरफान, वाजिद, जाहिद, शेरद्दीन, शमशाद आदि ने वहां आकर इमरान से मारपीट की थी। अहसान ने दोनों पक्षों में बीचबचाव करा दिया था। तभी से वह लोग अहसान से रंजिश मानने लगे थे।
आरोप है कि इसी रंजिश के चलते महरुद्दीन, इरफान, वलदीन और शेरद्दीन मंगलवार सुबह करीब 10:15 बजे अहसान के खेत पर पहुंचे और उसे बेरहमी से लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया और फरार हो गए। मवाना सीएचसी नजदीक होने से परिजन करीब 11 बजे अहसान को लेकर सीधे वहीं पहुंच गये। लेकिन, चिकित्सकों ने घटनास्थल परीक्षितगढ़ थानाक्षेत्र का बताते हुए बिना इलाज के लौटा दिया।
इसके बाद वे दोपहर करीब 12 बजे परीक्षितगढ़ थाने पहुंचे। आरोप है कि थाने में जानकारी देने के बाद भी पुलिस ने उन्हें दो घंटे बैठाये रखा। इस बीच, दर्द से तड़प रहे अहसान ने दोपहर करीब 2 बजे दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर महरुद्दीन, इरफान, वलदीन और शेरद्दीन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज की है।
अहसान की मौत थाने से बाहर हुई है। परिजनों ने थाने में आकर घटना की जानकारी दी थी। इस पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। इसमें पुलिस की कोई गलती नहीं है। -डॉ. प्रवीण रंजन एसपी देहात