पुलिस के उत्पीड़न के चलते एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी है। नैनी के विश्व बैंक कॉलोनी में फांसी लगाने वाले युवक शमीम अहमद ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह पुलिस की प्रताड़ना की वजह से आत्महत्या कर रहा है जबकि वह यूं मरना नहीं चाहता था। मारपीट की एक घटना में उसे फर्जी रूप से नामजद किया गया पर पुलिस ने उसकी सफाई सुनने की बजाय गलत धंधे कर मोटा पैसा पहुंचाने वाले अपराधियों का साथ दिया।
उसे थाने में भी धमकाया गया। सुसाइड नोट में सीओ पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भी उसकी बेगुनाही को दरकिनार कर दिया। युवक के पिता ने भी प्रदेश के मुख्य सचिव को प्रार्थनापत्र भेजकर अपने जवान बेटे की मौत के लिए सीधे तौर पर पुलिस को दोषी ठहराया है।
नैनी में कांशीराम कॉलोनी के पास विश्व बैंक कॉलोनी में रहने वाले शकील अहमद के तीन बेटों में शमीम अहमद उर्फ शम्मी (24) दूसरे नंबर पर था। बीएससी और आईटीआई करने के बाद उसने शहर के इंदिरा भवन में मोबाइल शॉप खोली थी। होली यानी 23 मार्च का दिन इस परिवार के लिए काला साबित हुआ। शम्मी अपने परिजनों के साथ घर में था। सभी टीवी पर मैच देख रहे थे। तभी अरैल से दो लड़कों ने आकर कांशीराम कॉलोनी में मारपीट की। तमाम लोगों ने लाठी-डंडे ले कर उन दोनों को खदेड़ लिया।
दोनों लड़के तो भाग गए लेकिन गलतफहमी में लोगों ने पान खाकर लौट रहे विश्व बैंक कॉलोनी के रामचंद्र रावत से मारपीट कर ली। कॉलोनी के लोग रावत को बचाने को जुटे तो शमीम भी अपने पिता शकील के साथ पहुंच गया। भीड़ लगी तो काशीराम कॉलोनी के लोग लौट गए। मगर उसी दिन शमीम और उसके पड़ोसी नौशाद के खिलाफ ही मारपीट तथा एससी-एसटी का केस लिखा दिया गया।
दूसरे रोज शमीम भी पिता के साथ थाने गया लेकिन आरोप है कि पुलिसवालों ने उसे बुरा-भला कहा और जलील किया। यही नहीं, शमीम के खिलाफ मुकदमा लिखाने वाले लोगों ने थाने आकर उसे पुलिसवालों के सामने धमकाया। उसे थाने से भगा दिया गया। शनिवार को सीओ करछना ब्रजनंदन राय ने शमीम को पिता शकील समेत अपने कार्यालय में बुलाया।
आरोप है कि सीओ ने उनसे सादे कागज पर दस्तखत करा लिया। बेगुनाही की बात भी नहीं सुनी। दूसरे दिन यानी रविवार को परिवार के लोग रिश्तेदार की शादी में चले गए। शम्मी घर में अकेले था। शाम को कई बार फोन करने पर भी जब उसने कॉल नहीं रिसीव की तो पिता ने पड़ोसी को घर भेजा। खिड़की से झांकने पर शम्मी घर में फंदे पर लटका दिखा।
दरवाजा खोलकर उसे किसी तरह फंदे से उतार अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी जान नहीं बची। मंगलवार को शम्मी के बिस्तर को साफ करते समय मां को उसमें दो पन्ने मिले जो असल में शमीम अहमद का सुसाइड नोट था। उसमें शम्मी ने लिखा था कि वह पुलिस से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है क्योंकि पुलिस अपराधियों के हाथों बिक चुकी है। उसकी कोई नहीं सुन रहा है। ऐसे में उसे जान देनी पड़ रही है
पिता शकील ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि सच्चाई का पता लगाकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस बाबत सीओ करछना ने कहा कि उन्होंने शमीम को बुलाकर बयान लिया था लेकिन अब इस घटना के बाद बिना जांच के वह कुछ नहीं कह सकते हैं।