पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष पंचायत चुनाव के नामांकन को उग्र कर रहा है, जिस वजह से हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि अगर कुछ लोग सोचते हैं कि वे एकतरफा हिंसा कर सकते हैं तो उन्हें याद रखना चाहिए कि राज्य की जनता उन्हें करारा जवाब देगी। उन्होंने राज्य में हो रही हिंसा में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का हाथ होने से भी इनकार किया।
भाजपा-सीपीआई (एम) पर निशाना
टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महेशताला में पार्टी कार्यालय के बाहर कहा कि जिन कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन बेहतर नहीं था, पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया। विपक्षी नेता नामांकन दाखिल करते समय हिंसा कर रहे हैं। वह राज्य की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। गुरुवार को चोपड़ा में हुई हिंसा को सीपीआई (एम) ने अंजाम दिया। जबकि, भांगोर में आईएसएफ हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा की केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने राज्य के बकाये फंड को रोक दिया है। केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके भाजपा टीएमसी नेताओं को डराने की कोशिश कर रही है।
मंगलवार को हुआ था हमला
मंगलवार को उत्तर 24 परगना में इंडियन सेक्युलर फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी। सेक्युलर फ्रंट ने सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाया कि वह उन्हें नामांकन भरने से रोक रहे हैं। झड़प को शांत करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंची थी। इस दौरान कई बम भी फेंके गए थे। वाहनों के साथ तोड़फोड़ भी की गई थी। झड़प में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता घायल हो गए थे। आईएसएफ नेता और भांगोर विधायक नौशाद सिद्दीकी ने टीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि टीएमसी के गुंडे रात से ही हमारे उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोक रहे हैं। टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि आईएसएफ इलाके में हिंसा फैला रही थी।
पिछले पंचायत चुनावों में भी खूब हुई हिंसा
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है। 2013 और 2018 के पंचायत चुनाव भी अपवाद नहीं थे। 2013 में जहां पंचायत चुनाव में हिंसा के चलते 39 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2018 में 21 लोग मारे गए थे। पिछले पंचायत चुनाव में 34 प्रतिशत सीटों पर टीएमसी निर्विरोध जीती थी, साथ ही 90 प्रतिशत सीटों पर टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की थी।