कश्मीर घाटी के उड़ी स्थित सेना के शिविर पर आतंकी हमले में शहीद जवान गंगाधर दोलुई के पिता ओंकारनाथ दोलुई ने राज्य सरकार की ओर से घोषित दो लाख रुपये के मुआवजे और होमगार्ड की नौकरी को नाकाफी बताते हुए इसे लेने से इनकार कर दिया है। दोलुई परिवार हावड़ा जिले के जमुना बलिया गांव का रहने वाला है। उन्हें अपने शहीद बेटे के अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये की रकम उधार लेनी पड़ी थी।
दो साल पहले बेटे के सेना में भर्ती होने से पहले तक 64 साल के दोलुई दैनिक मजदूर थे। बेटे के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुआवजे की यह रकम शहीद का अपमान है। सरकार ने हमें दो लाख रुपये देने का एलान किया है। लेकिन जहरीली शराब पीकर मरने वालों के परिजनों को भी इतनी ही रकम दी जाती है। दोलुई ने कहा कि सरकार ने इस मुआवजे के अलावा उनके छोटे बेटे को होमगार्ड की नौकरी देने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन हम इससे इंकार कर देंगे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते मंगलवार को इस मुआवजे का एलान किया था। ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने शहीदों के परिजनों को 20-20 लाख का मुआवजा देने का एलान किया है। बिहार व झारखंड ने भी क्रमश: 11 और 10 लाख रुपये देने की बात कही है। इस हमले में शहीद एक अन्य जवान विश्वजीत घोराई के बड़े भाई रंजीत घोराई ने फिलहाल मुआवजे के मुद्दे पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उसने कहा कि टीवी चैनलों के जरिए उनको मुआवजे की रकम की जानकारी मिली है। लेकिन हम फिलहाल इस मुद्दे पर बात करने की मनोदशा में नहीं हैं।