जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा दांव चल दिया है। उन्होंने भाजपा के सभी विरोधी दलों को एक चिट्ठी लिखी और एकजुट होने की अपील की। ममता बनर्जी ने चिट्ठी में लिखा, 'मुझे लगता है कि अब वह समय आ गया है, जब हमें लोकतंत्र बचाने के लिए भाजपा के खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए।'
ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'मैं यह चिट्ठी उन सभी राजनीतिक पार्टियों को लिख रही हूं, जो भाजपा के खिलाफ हैं। मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि भाजपा की केंद्र सरकार लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश कर रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली सरकार के खिलाफ पास हुआ एनसीटी बिल है, जो दोनों सदनों से पास हो गया। केंद्र सरकार ने एक चुनी हुई सरकार की ताकत छीनकर उपराज्यपाल को दे दी। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दो बार दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराया। जब भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से नहीं जीत सकी तो उसने उपराज्यपाल के जरिए शासन करने का तरीका ढूंढ निकाला। जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, वहां राज्यपाल भाजपा के कार्यकर्ताओं की तरह काम करते हैं। उन राज्यों में नेताओं के खिलाफ ईडी, सीबीआई और दूसरी जांच एजेंसियों को लगाया जाता है। गैर भाजपा शासित राज्यों को केंद्र सरकार पैसे देने में आनाकानी करती है। मोदी सरकार सभी सरकारी संपत्तियों को बेचना चाहती है। ये लोगों के साथ धोखा है।'
ममता बनर्जी ने जिन राजनीतिक पार्टियों को चिट्ठी लिखी है, उनमें कांग्रेस (सोनिया गांधी), एनसीपी (शरद पवार), डीएमके (एमके स्टालिन), राजद (तेजस्वी यादव), शिवसेना (उद्धव ठाकरे), आम आदमी पार्टी (अरविंद केजरीवाल), बीजेडी (नवीन पटनायक) और वाईएसआर कांग्रेस (जगन रेड्डी) शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो ममता बनर्जी की इस चिट्ठी के कई मायने हैं। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी ने एक तरह से बंगाल में कांग्रेस को गठबंधन का न्योता दे दिया है। ऐसे में अटकलें लगने लगी हैं कि अगर चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिलता है तो ममता बनर्जी सरकार बनाने के लिए कांग्रेस का दामन थाम सकती हैं। हालांकि, कांग्रेस ने ममता की धुर विरोधी माकपा से गठबंधन कर रखा है। ऐसे में राज्य का राजनीतिक भविष्य क्या होगा, यह तो नतीजों से पता लगेगा, लेकिन इतना तय है कि बंगाल का सियासी घमासान काफी रोचक होगा।