अभिषेक बनर्जी ने घोषणा की कि ममता बनर्जी छह मार्च को कोलकाता के मेट्रो चैनल पर वोटर लिस्ट गड़बड़ी के खिलाफ धरना देंगी। टीएमसी ने एसआईआर प्रक्रिया में धांधली और नामों की कथित गलत तरीके से कटौती का आरोप लगाया है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अभिषेक बनर्जी ने रविवार को बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य की वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ छह मार्च को दोपहर दो बजे से कोलकाता के मेट्रो चैनल पर धरना देंगी। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के सुधार (एसआईआर) में भारी धांधली हुई है।
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मीडिया वार्ता में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने पहले से तय टारगेट पूरा करने के लिए आम लोगों के नाम जबरदस्ती हटा दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 243 ऐसे लोगों के फोन आए हैं जो जिंदा हैं, लेकिन लिस्ट में उन्हें मृत दिखा दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य की कैबिनेट मंत्री शशि पांजा और मुख्य सचिव नंदिनी मुखर्जी जैसे बड़े नामों पर भी फैसला अटका हुआ है, तो आम जनता का क्या हाल होगा?
टीएमसी नेता ने क्रिकेटर ऋचा घोष, मंत्री गुलाम रब्बानी और नोबेल विजेता अमर्त्य सेन का नाम जांच के दायरे में रखने पर आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग बीजेपी को वोट नहीं देते, उनके नाम चुन-चुनकर हटाए गए हैं। इसमें महिलाएं, अल्पसंख्यक और एसटी समुदाय के लोग शामिल हैं। उन्होंने आयोग से पूछा कि आखिर कितने बांग्लादेशी या रोहिंग्या मिले, इस पर स्थिति साफ होनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने अपनी पुरानी भविष्यवाणी दोहराई कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 50 सीटों से नीचे सिमट जाएगी। उन्होंने तंज कसा कि अगर 60 लाख वोटरों के नाम जांच के दायरे में हैं, तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पदों की भी जांच होनी चाहिए।
आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब कुल 7.04 करोड़ वोटर बचे हैं। सुधार प्रक्रिया से पहले यह संख्या 7.66 करोड़ थी, यानी करीब 61 लाख से ज्यादा नामों में बदलाव हुआ है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 24.16 लाख वोटर मृत पाए गए, 12.20 लाख अनुपस्थित थे और 19.88 लाख दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। ड्राफ्ट लिस्ट के बाद 5.46 लाख नाम और हटाए गए। फिलहाल 60.06 लाख वोटरों को 'अंडर एडजुडिकेशन' (जांच के दायरे) में रखा गया है, जिनकी पात्रता की जांच आने वाले समय में होगी।