गौर करने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर चाय नहीं बनाई। दरअसल, 21 अगस्त 2019 के दौरान ममता बनर्जी पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तीन दिवसीय दौरे पर गई थीं। उस दौरान वह दीघा के पास स्थित एक गांव दत्तापुर में चाय की दुकान पर पहुंची और खुद ही चाय बनाई। उस वक्त दीदी ने कहा था कि कभी-कभी जीवन में छोटी खुशियां हमें खुश कर सकती हैं। अच्छी चाय बनाना और परोसना भी इनमें से एक है।
चाय बनाने से पहले ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में रैली को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम आंदोलन के दौरान मुझ पर काफी अत्याचार हुए। मुझे नंदीग्राम आने से रोका गया, लेकिन अत्याचार के बावजूद मैं रास्ते से नहीं हटी। मैं नंदीग्राम के आंदोलन को पूरे बंगाल में ले गई। आपने मुझे स्वीकारा, इसलिए मैं नंदीग्राम आई। सिंगूर के बाद नंदीग्राम का ही आंदोलन हुआ। मैंने पहले से ही सोच रखा था कि नंदीग्राम से ही चुनाव लड़ूंगी। जब आप कहेंगे, तभी नामांकन दाखिल करूंगी। मैं बंगाल की बेटी हूं, बाहरी कैसे हो सकती हूं। आप नहीं चाहेंगे तो मैं नंदीग्राम से नहीं लड़ूंगी।
रैली में भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने चंडी पाठ भी किया। उन्होंने नंदीग्राम में मंच पर कई मंत्रों का उच्चारण किया। साथ ही, लोगों से 'खेला होबे' का नारा भी लगवाया। ममता बनर्जी ने कहा कि मैं हिंदू हूं। मुझे हिंदुत्व न सिखाएं और न ही मेरे साथ हिंदुत्व कार्ड खेलें। हम हर धर्म के लोगों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेंगे।