पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार तना तनी जारी है। इस मामले में जहां केंद्र सरकार एक्शन के मूड में नजर आ रही है तो वहीं ममता बनर्जी ने सोमवार को चक्रवात यास पर एक बार फिर से समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में उन्होंने साफ-साफ कहा कि चक्रवात यास प्रभावित क्षेत्र दीघा की जिम्मेदारी मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को दी गई है, इसलिए वे अभी कहीं जा नहीं सकते। वहीं उन्होंने मुख्य सचिव के सेवा विस्तार पर कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है, समय आने पर मामले पर जवाब देंगे।
क्या है मामला
25 मई को, पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र की मंजूरी का हवाला देते हुए एक आदेश जारी किया कि सार्वजनिक सेवा के हित में, अलपन बंद्योपाध्याय की सेवाओं का विस्तार तीन महीने आगे किया जाता है। लेकिन, 28 मई को केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखा कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने बंद्योपाध्याय की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से भारत सरकार के साथ स्थानांतिरत किया है और राज्य सरकार से अनुरोध है कि अधिकारी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए। डीओपीटी ने मुख्य सचिव को 31 मई को सुबह 10 बजे तक रिपोर्ट करने का निर्देश भी दिया। लेकिन ममता बनर्जी सरकार के मुख्य सचिव कोलकाता में ही मौजूद रहे और देर शाम पश्चिम बंगाल के सचिवालय में बैठक कर रहे थे।