मालेगांव बम धमाके के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की याचिका के खिलाफ एक पीड़ित ने बॉम्बे हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। पुरोहित ने याचिका दायर कर खुद पर लगे सभी आरोपों को रद्द करने की मांग की है।
वर्ष 2008 ब्लास्ट के पीड़ित ने भी इस याचिका के खिलाफ अदालत में गुहार लगाई है। जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की पीठ पीड़ित निसार अहमद बिलाल की याचिका पर 25 नवंबर को सुनवाई करेगी। बिलावल के एडवोकेट बीए देसाई ने यह जानकारी दी।
वहीं पुरोहित के लिए पेश वकील एवं पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बिलाल के आवेदन का विरोध किया। रोहतगी ने तर्क दिया कि पुरोहित ने उनके खिलाफ आरोपों को रद्द करने की मांग की थी क्योंकि एनआईए उन पर मुकदमा चलाने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197 के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ले पाई थी।
रोहतगी ने कहा कि चूंकि याचिका मंजूरी के प्रक्रियात्मक आधार पर थी, इसलिए इसमें पीड़ितों द्वारा किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा 197 लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया को रोकती है और सरकार से इसके लिए अनुमति लेनी जरूरी है। हालांकि, अधिवक्ता देसाई ने अदालत से हस्तक्षेप के आवेदन को स्वीकार करने का आग्रह किया।