सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट से कहा कि वह 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित की याचिका पर तेजी से फैसला करे। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने यह कहते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि मामले में उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा दी गई मंजूरी कानूनी रूप से गलत थी।
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि इस मामले में अब तक 246 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है। यह याचिका हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हम हाई कोर्ट से याचिका पर विचार करने और कानून के अनुसार इस पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध करते हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 दिसंबर, 2017 को हाई कोर्ट ने सरकार की उस मंजूरी को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिसने मालेगांव बम धमाका मामले में कर्नल पुरोहित के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इससे पहले विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने उन्हें मामले से मुक्त करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
कर्नल पुरोहित के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की ओर से पूर्व अनुमति की जरूरत थी क्योंकि वह उस समय एक सेवारत सेना अधिकारी थे। 29 सितंबर, 2008 को मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में लगे बम में विस्फोट से छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि 100 से अधिक घायल हो गए थे। इस मामले के सभी सात आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।