मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक याचिका में दावा किया था कि अभियोजन पक्ष मुकदमे को खींच रहा है। एनआईए उन गवाहों को बुला रही है, जो आरोपियों के लिए प्रासंगिक नहीं हैं।
वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले की सुनवाई कर रही मुंबई की विशेष अदालत ने गुरुवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को इस बात का आकलन करने का निर्देश दिया कि गवाही के लिए किसी गवाह को बुलाने से पहले उसकी गवाही प्रासंगिक होगी या नहीं।
विज्ञापन
मामले में मुख्य आरोपी भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की याचिका का पालन करते हुए एनआईए अदालत ने यह निर्देश जारी किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अभियोजन पक्ष मुकदमे को खींच रहा है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एनआईए अदालत अब तक 295 गवाहों का बयान दर्ज चुकी है, जिनमें से लगभग 30 गवाह पलट गए हैं यानी उन्होंने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दावा किया कि एनआईए उन गवाहों को बुला रही है, जो आरोपियों के लिए प्रासंगिक नहीं हैं। प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा ने कई नामों का हवाला दिया, जब एनआईए ने अप्रासंगिक गवाहों को बुलाया और बाद में जिस दिन उन्हें पेश होना था, उस दिन वह हाजिर नहीं हुए। एनआईए ने अपने जवाब में कहा कि गवाहों को इस आधार पर छोड़ा नहीं जा सकता क्योंकि वे अभियुक्तों के लिए प्रासंगिक नहीं हैं।