मालदीव में हुए चुनाव परिणाम की घोषणा कर दी गई है। राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के एकमात्र उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को विजयी घोषित किया जा चुका है। वहां के निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चुनाव हार गए हैं। यामीन भारत विरोधी और चीन के पक्ष में रुझान रखने वाले नेता बताए जाते हैं। इस नये घटनाक्रम को मालदीव में भारत की बड़ी जीत माना जा रहा है। नई दिल्ली अपने राज्य केरल से सटे इस पड़ोसी देश (मालदीव) की हर घटना पर गहराई से निगाह रख रही है।
वहां की अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। ऐसे में विपक्ष के पास उम्मीदवारों का टोटा पड़ गया था। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के मुकाबले में सोलिह खड़े हुए तो सभी चार राजनीतिक दलों के विपक्ष के नेताओं ने इब्राहिम सोलिह को अपना समर्थन दे दिया। इस राजनीतिक कूटनीति पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार को काफी उम्मीदें थी।
रवीश का अनुमान था मालदीव में परिणाम अब्दुल्ला यामीन के विपरीत आने की पूरी संभावना है। चुनाव बाद पर्यवेक्षकों ने भी अब्दुल्ला यामीन द्वारा निष्पक्ष चुनाव न कराने संबंधी आरोप लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद अब्दुल्ला यामीन पिछड़ गए। सोलिह को 58 प्रतिशत से अधिक मत मिले।
मालदीव के चुनाव में कुछ दिलचस्प पहलू भी है। मालदीव की आबादी साढ़े तीन लाख के करीब है। इसमें से ढाई लाख के करीब मतदाता हैं। बड़ी संख्या में लोग श्रीलंका और मलेशिया में रहते हैं। पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने भी श्रीलंका में शरण ले रखी है। इसलिए चुनाव को संपन्न कराने के लिए मालदीव ने श्रीलंका और मालदीव में भी मतदान केंद्र बनाया था।