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उत्तर भारत में जानलेवा बारिश के पीछे ये है कारण, अब तक लगभग 40 लोग गंवा चुके जान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 25 Sep 2018 09:37 AM IST
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उत्तर भारत के कई भागों में औसत से 10 गुना अधिक बारिश हो रही है। जिससे अभी तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है और 1600 से अधिक लोगों के फंसने की खबर है। शुक्रवार की बात करें तो उत्तर-पश्चिमी भारत में सामान्य से 454 फीसदी अधिक बारिश हुई है। मौसम केंद्रों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्रों में मंगलवार को भी बारिश होगी।

इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात भी हो रहा है, जिसके कारण मानसून भी पहले के मुकाबले इस बार देरी से जाएगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे का कारण गुजरात में चल रही तेज पश्चिमी हवाएं, ओडिशा में आया चक्रवात, हरियाणा के ऊपर हवा का लो प्रेशर बनना, अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बढ़ना और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का सक्रिय होना है। इन्हीं सब कारणों से भारी बारिश हो रही है।



पंजाब और हरियाणा में किसान परेशान

पंजाब में भी इस बार सामान्य से 1,193 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वहीं राजस्थान को 317 फीसदी अधिक बारिश का सामना करना पड़ा है।

इसके अलावा पंजाब में रविवार देर रात कपूरथला में छह घरों की छतें गिर गई, जिसमें दो मासूमों समेत तीन की मौत हो गई। जबकि 13 लोग जख्मी हो गए। इसी प्रकार जालंधर में बारिश के जलभराव में आठ माह की बच्ची की डूबने से मौत हो गई। हरियाणा में बारिश के चलते अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई और करीब 20 लोग घायल हैं।

वहीं मेरठ और सहारनपुर में दीवार गिरने से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। बिजनौर और शामली में बिजली गिरने से एक महिला और एक युवक की मौत हुई है।

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उत्तर भारत के कई भागों में औसत से 10 गुना अधिक बारिश हो रही है। जिससे अभी तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है और 1600 से अधिक लोगों के फंसने की खबर है। शुक्रवार की बात करें तो उत्तर-पश्चिमी भारत में सामान्य से 454 फीसदी अधिक बारिश हुई है। मौसम केंद्रों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्रों में मंगलवार को भी बारिश होगी।

इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात भी हो रहा है, जिसके कारण मानसून भी पहले के मुकाबले इस बार देरी से जाएगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे का कारण गुजरात में चल रही तेज पश्चिमी हवाएं, ओडिशा में आया चक्रवात, हरियाणा के ऊपर हवा का लो प्रेशर बनना, अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बढ़ना और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का सक्रिय होना है। इन्हीं सब कारणों से भारी बारिश हो रही है।

पंजाब और हरियाणा में किसान परेशान

पंजाब में भी इस बार सामान्य से 1,193 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वहीं राजस्थान को 317 फीसदी अधिक बारिश का सामना करना पड़ा है।

इसके अलावा पंजाब में रविवार देर रात कपूरथला में छह घरों की छतें गिर गई, जिसमें दो मासूमों समेत तीन की मौत हो गई। जबकि 13 लोग जख्मी हो गए। इसी प्रकार जालंधर में बारिश के जलभराव में आठ माह की बच्ची की डूबने से मौत हो गई। हरियाणा में बारिश के चलते अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई और करीब 20 लोग घायल हैं।

वहीं मेरठ और सहारनपुर में दीवार गिरने से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। बिजनौर और शामली में बिजली गिरने से एक महिला और एक युवक की मौत हुई है।

पर्यटक भी फंसे

जम्मू-कश्मीर बेहाल

जम्मू-कश्मीर में बारिश के बाद घर गिरने से डोडा जिले में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि कठुआ जिले में दो लोगों की मौत हुई है। यहां रणजीत सागर बांध का जलस्तर बढ़ने के कारण उसके इमरजेंसी गेट खोल दिए गए हैं। हिमाचल में कुल्लू और कांगड़ा के जवाली में नदी-नालों में आई बाढ़ में चार लोग बह गए जबकि चंबा, धर्मशाला और ऊना में सात महीने की बच्ची समेत तीन लोगों की मौत हो गई।

40 की मौत 1600 फंसे

बारिश के काराण अभी तक कुल 40 लोगों की मौत हो गई है और 1600 लोग फंसे हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में 8, हरियाणा में 7, पंजाब में 11, उत्तराखंड में 6 और जम्मू-कश्मीर में 8 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश में करीब 1600 लोग अलग अलग जगहों पर फंसे हुए हैं।

बारिश के कारण 350 से अधिक लोग लाहौल-स्पीति में फंसे हुए हैं। कुल्लू में ट्रैकिंग कर रहे आईआईटी रुड़की के 35 छात्रों से 22 तारीख के बाद परिवारों का संपर्क नहीं हो सका है। हिमाचल में नदियों का जलस्तर बढ़ने और लैंडस्लाइडिंग की वजह से कुल्लू-मनाली जाने वाले नेशनल हाईवे समेत 378 सड़कें टूट गई हैं।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि देश के इस हिस्से में बारिश आमतौर पर तब होती है जब बंगाल की खाड़ी से ग्रीष्मकालीन गर्मी के कारण स्थानीय अवसाद नमी की लंबी हवाओं को आकर्षित करते हैं।

कम दबाव वाले क्षेत्रों को नुकसान

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के निदेशक जनरल केजे रमेश का कहना है कि चक्रवात के कारण कम दबाव वाले क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है। जिसने गुजरात के तट को भी प्रभावित किया है।

बता दें शुक्रवार सुबह ओडिशा के गोपालपुर में आए चक्रवात के कमजोर होने के बाद से पूरे उत्तर भारत में हवाओं का दौर शुरू हो गया। जिसके बाद तेलंगाना से कर्नाटक, फिर मध्यप्रदेश, गुजरात, दक्षिणी राजस्थान में भारी बारिश हुई। वहीं कई राज्यों में बारिश के साथ साथ ठंडी हवाएं भी चलने लगीं। इसके साथ ही पर्वतीय राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर ने हिमपात शुरू हो गया। इसके कारण सेब और आलू की खेती को नुकसान पहुंचा है।

भारी बारिश के कारण पंजाब और हरियाणा के बड़े भागों में धान की खेती को नुकसान हुआ है। ये हालात केवल उत्तर भारत के ही नहीं हैं बल्कि आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भी ओडिशा में आए चक्रवात के बाद भारी बारिश हो रही है।

आईएमडी के बंगलूरू डायरेक्टर सीएस पाटिल का कहना है कि बंगलूरू में बीते 24 घंटे के भीतर 12 से 20 सेमी तक की बारिश हुई है। यह सामान्य से दो गुना अधिक है। विशेषज्ञ का कहना है कि उत्तर भारत से इस हफ्ते मानसून पीछे हट सकता है। जिसके बाद तापमान बढ़ने लगेगा। 
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