सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल सिंह गुर्जर ने कहा है कि साइन लैंगवेज को कामकाज की भाषा बनाया जाना चाहिए। वह इसके लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखेंगे। यह बात उन्होंने रविवार को कही।
साल 2011 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 50 लाख लोग ऐसे हैं जो सुन पाने में सक्षम नहीं हैं। वहीं 20 लाख लोग ऐसे हैं जो बोल पाने में सक्षम नहीं हैं। नेशनल असोसिएशन ऑफ डीफ प्रेजिडेंट एएस नारायण ने रविवार को सामाजिक न्याय मंत्रालय में आग्रह कर कहा कि साइन लैंग्वेज को भी कामकाज की भाषा बनाया जाए।
उनके आग्रह करने के बाद गुर्जर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 'हम गृह मंत्री को खत लिखकर आपकी भावनाओं के बारे में बताएंगे।' मंत्री ने आगे कहा कि साइन लैंग्वेज पढ़ाई की भाषा है, मूक बाधिर लोगों से बात करने के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। उन्होंने कहा कि वह इंटरनेशनल डे ऑफ साइन लैंग्वेज (23 सितंबर) के दिन यह बात कहेंगे।
मामले पर डिपार्टमेंट ऑफ इम्पावरमेंट ऑफ पर्सन विद डिलेबिलिटीज की सेक्रेटरी शकुंतला डी गमनिम ने कहा कि 'हमने सभी केंद्रीय मंत्रियों और विभागों को कहा है कि सभी औपचारिक कार्यक्रमों में एक साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटर की नियुक्ति की जाए। ताकि संचार की समस्या के कारण कोई भी कार्यक्रम से बाहर न रहे।'
मामले पर डिपार्टमेंट की ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉली चक्रवर्ती ने कहा कि इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर साल 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ही लोगों को साइन लैंग्वेज में प्रशिक्षित करना था। अभी इस सेंटर द्वारा साइन लैंग्वेज डिक्शनरी में 3 हजार शब्द जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है। मार्च 2019 तक ये काम पूरा भी हो जाएगा।