मकर संक्रांति पर आयुष मंत्रालय 14 जनवरी को वैश्विक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन करेगा। इसमें 75 लाख लोग भाग लेंगे। मंत्रालय ने कहा कि सभी प्राणियों के लिए सूर्य की जीवनदायी किरणों के लिए कृतज्ञता प्रदर्शित करने के लिए यह सूर्य नमस्कार होगा। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती होती है, जो महामारी के दौर में खासी महत्वपूर्ण है। धूप से विटामिन डी मिलता है, जो दुनियाभर की सभी चिकित्सा शाखाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंत्रालय के मुताबिक, इससे बदलती जलवायु और धरती के गर्म होने की समस्या की ओर भी ध्यान आकर्षित होगा। रोजमर्रा के कामकाज में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल हो तो कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो धरती के लिए खतरा बन चुका है। इस कार्यक्रम से दुनिया को हमारी समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की भी जानकारी मिलेगी। आम तौर पर सुबह के समय किए जाने वाले सूर्य नमस्कार में आठ आसन होते हैं। इससे शरीर और दिमाग के समन्वय में मदद मिलती है।
सूर्य की महत्ता
वैज्ञानिक रूप से सूर्य नमस्कार को प्रतिरक्षा विकसित करने और जीवन शक्ति में सुधार करने के लिए जाना जाता है। महामारी की ऐसी स्थिति के दौरान स्वास्थ्य के लिए सूर्य बेहद महत्वपूर्ण है।
कोरोना काल में क्यों जरूरी?
मंत्रालय ने कहा कि सूर्य के संपर्क में आने से मानव शरीर को विटामिन डी मिलता है, जिसे दुनिया भर की सभी चिकित्सा शाखाओं में व्यापक रूप से मान्यता मिली है। बयान में यह भी कहा गया है कि सामूहिक सूर्य नमस्कार प्रदर्शन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का संदेश देना भी है।