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इसरो के हाथ बड़ी कामयाबी: सीई20 इंजन का सफल परीक्षण, बढ़ेगी एलवीएम3 की क्षमता; गगनयान मिशन के लिए क्यों अहम?

Thu, 10 Sep 2026 02:25 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली।

सार

इसरो ने महेंद्रगिरी में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन बढ़े हुए थ्रस्ट पर सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट किया। इससे एलवीएम 3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। परीक्षण में LTPM का प्रदर्शन भी सफल रहा।
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इसरो ने CE20 इंजन का किया सफल परीक्षण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के बढ़े हुए थ्रस्ट पर 'फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट' सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे  एलवीएम 3 लॉन्च व्हीकल की पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान प्रोग्राम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसरो ने गुरुवार को बताया कि यह परीक्षण 9 सितंबर को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो परिसर (आईपीआरसी) में किया गया था।
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इसरो ने क्या बताया? 
एक्स पर एक पोस्ट में, अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, 'आने वाले एलवीएम 3 मिशन के सी32 अपर स्टेज के लिए तय सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के बढ़े हुए थ्रस्ट पर 'फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट' 9 सितंबर, 2026 को महेंद्रगिरि के इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सफलतापूर्वक किया गया।'

इसरो ने यह भी कहा कि टेस्ट के दौरान एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (एलटीपीएम) का परफॉर्मेंस सफलतापूर्वक दिखाया गया। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के सी32 स्टेज के लिए बनाया गया है।
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सीई20 इंजन  का क्या काम? 
सीई20 इंजन एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को पावर देता है। स्पेस एजेंसी भविष्य के एलवीएम3 मिशन को बेहतर पेलोड क्षमता के साथ चलाने के लिए सीई20 इंजन का इस्तेमाल करते हुए, 22-टन थ्रस्ट वाले अपग्रेडेड सी32 स्टेज पर काम कर रही है।

यह परीक्षण मार्च में महेंद्रगिरी संयंत्र में 22 टन के भ्रस्ट स्तर पर किए गए सीई 20 इंजन के समुद्र तल पर किए गए हॉट टेस्ट के बाद किया गया है। यह परीक्षण नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग करके किया गया था।

मार्च में किए गए परीक्षण का क्या मकसद था? 
मार्च में किया गया परीक्षण थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल पर परीक्षण के लिए इंजन की योग्यता का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था। इसरो ने कहा था कि 165 सेकंड के परीक्षण के दौरान इंजन और परीक्षण सुविधा ने अपेक्षा के अनुसार प्रदर्शन किया।

सीई20 का हाई-एरिया-रेशियो नोजल, अपने कम एग्जिट प्रेशर की वजह से समुद्र-स्तर पर टेस्टिंग को काफी मुश्किल बना देता है। इसरो ने बताया है कि नोजल के अंदर फ्लो सेपरेशन से जबरदस्त वाइब्रेशन और थर्मल स्ट्रेस पैदा हो सकते हैं, जिससे नोजल की बनावट की मजबूती पर असर पड़ सकता है। हाल ही में हुए सफल उड़ान स्वीकृति परीक्षण से आगामी एलवीएम 3 मिशनों के लिए अपग्रेडेड सी32 चरण को परिचालन में लाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा है।

यह घटनाक्रम 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ17 के जरिए एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट -05 (ईओएस-05) के सफल प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद सामने आया है।
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