पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल
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पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ हालिया आरोपों को लेकर दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर मुख्य सचिव पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। टीएमसी सांसद ने सुब्रत गुप्ता और मनोज अग्रवाल को राज्य में एसआईआर प्रक्रिया का प्रमुख वास्तुकार बताते हुए उन पर बड़े पैमाने पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था।
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टीएमसी सांसद ने क्या कहा?
मोइत्रा ने कहा था, 'बंगाल एसआईआर के दो सबसे बड़े वास्तुकारों ने हर संभव गैरकानूनी काम किया है। सुब्रत काकू और मनोज अंकल, सावधान रहें। भारत अब आपके पीछे आ रहा है। बच नहीं पाओगे।' इन आरोपों पर मनोज अग्रवाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सांसद महुआ मोइत्रा पर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के प्रयास करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह कानूनविदों से सलाह ले रहे हैं और टीएमसी सांसद के खिलाफ मानहानि का मुकदमा शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
एसआईआर प्रक्रिया मुख्य सचिव ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए अग्रवाल ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित वैधानिक नियमों के अनुसार की जाती है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को उचित समय के भीतर उनकी अपील पर फैसला पाने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से पश्चिम बंगाल में एसआईआर न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित और निपटाई गई अपीलों का विवरण भी मांगा था।
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ईसीआई को सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि मतदाता सूची से बाहर किए गए और अपने निष्कासन को चुनौती देने वाले लोगों की अपीलों का उचित समय के भीतर निपटारा होना चाहिए। जस्टिस बागची ने सुनवाई के दौरान कहा था कि मामला ऐसे मताधिकार से वंचित लोगों से जुड़ा है, जिन्हें अपील करने का अधिकार है और उस अधिकार को उचित समय में प्रभावी किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने ईसीआई को लंबित अपीलों का विवरण देने का भी निर्देश दिया था। यह विवरण कितनी अपीलें मतदाताओं को सूची से बाहर करने और कितने नाम सूची में शामिल करने से संबंधित है। कोर्ट ने निपटाई गई और लंबित अपीलों की संख्या बताने के साथ यह भी बताने को कहा था कि अभी कितने अतिरिक्त न्यायाधिकरणों की जरूरत है। साथ ही लंबित अपीलों के निपटारे को सुव्यवस्थित करने के लिए क्या व्यवस्था प्रस्तावित है। ये निर्देश पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं के समूह में दायर एक आवेदन पर दिए गए थे।