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तुषार गांधी: बापू ने सशस्त्र क्रांतिकारियों का योगदान स्वीकारा, शाह को बताने की जरूरत नहीं

Sun, 15 Jan 2023 02:43 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तुषार गांधी ने कहा, बापू ने स्वीकार किया था कि स्वतंत्रता केवल उनके प्रयासों से नहीं आई, बल्कि यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम था। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान को भी स्वीकार किया था। 
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को देश के स्वतंत्रता आंदोलन में सशस्त्र क्रांतिकारियों के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, महात्मा गांधी ने खुद ऐसे क्रांतिकारियों की भूमिका को स्वीकार किया था। 

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तुषार गांधी ने कहा, बापू ने स्वीकार किया था कि स्वतंत्रता केवल उनके प्रयासों से नहीं आई, बल्कि यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम था। बापू ने देश की आजादी का श्रेय सभी को दिया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान को भी स्वीकार किया था। 

शाह के पास कहने को कुछ नहीं 
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कहा, हमें इन बातों को कहने के लिए शाह की जरूरत नहीं है। शाह ने ये बातें इसलिए कही हैं, क्योंकि उनके पास खुद के बारे में या जिस विचारधारा को वह मानते हैं, उसमें कहने को कुछ नहीं है। दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान केवल अहिंसक आंदोलन का व्याख्यान एक शिक्षा, इतिहास और किंवदंतियों के माध्यम से किया गया, जबकि भारत की स्वतंत्रता सशस्त्र क्रांतिकारियों के योगदान सहित सामूहिक प्रयासों का परिणाम थी।
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महात्मा नहीं सामान्य इंसान थे बापू 
तुषार गांधी ने अपनी पुस्तक द लॉस्ट डायरी ऑफ कस्तूर, माय बा" के बारे में कहा, बापू किसी और की तरह एक सामान्य इंसान थे और इसीलिए उन्होंने अपनी किताब में उन्हें महात्मा के रूप में संदर्भित नहीं किया है। उन्होंने कहा, महात्मा की पहचान अविश्वसनीय है और किसी को मोहनदास करमचंद गांधी को समझने की जरूरत है, तो उन्हें ऐसे समझा जाए कि एक साधारण इंसान जो चीजों को हासिल करने के लिए अपनी क्षमताओं से परे उठ गया। उन्होंने कहा, वह उतने ही साधारण थे जितने कि हम। 

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