फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharashtra: रक्षाबंधन पर महिला को तोहफे में मिला ऑटो, पति के कैंसर से बीमार होने के बाद खुद संभाली जिम्मेदारी

Sun, 10 Aug 2025 04:35 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई की महिला ऑटो ड्राइवर सरिका को रक्षाबंधन पर समाजसेवी डॉ. अनील काशी मुरारका ने नया ऑटो रिक्शा भेंट किया। अब तक किराए का ऑटो चलाने वाली सरिका की आय में बढ़ोतरी होगी और वे अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित कर सकेंगी। इस तोहफे से सरिका को न केवल आर्थिक आजादी मिली, बल्कि रक्षाबंधन का त्योहार उनके जीवन में स्थायी बदलाव लेकर आया।

विज्ञापन
रक्षाबंधन पर महिला को तोहफे में मिला नया ऑटो - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुंबई की सरिका मेस्त्री के लिए इस बार का रक्षाबंधन बेहद खास रहा। उन्हें एक समाजसेवी से नए ऑटो रिक्शा का तोहफा मिला, जिससे अब उनकी आमदनी बढ़ेगी और बेटियों का भविष्य सुरक्षित होगा। सरिका अंबोली, पश्चिमी उपनगर की रहने वाली हैं और कुछ महीने पहले ऑटो चलाना शुरू किया था, जब उनके पति, जो खुद भी ऑटो चलाते थे, कैंसर से बीमार हो गए।
विज्ञापन


सरिका अब तक किराए के ऑटो पर काम कर रही थीं, जिससे रोज की कमाई का बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता था। इसी बीच, एक दिन उनकी मुलाकात समाजसेवी डॉ. अनील काशी मुरारका से हुई, जो उनकी सवारी बने। बातचीत में डॉ. मुरारका को सरिका की आर्थिक कठिनाइयों का पता चला। सरिका की हिम्मत और जज्बे से प्रभावित होकर उन्होंने उनकी मदद करने का निर्णय लिया।

लोकल यात्रा बनी जिंदगी का मोड़
कुछ दिन बाद, डॉ. मुरारका ने लोकल अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में सरिका को नया ऑटो रिक्शा सौंपा। इस मौके पर सरिका ने उन्हें राखी बांधकर धन्यवाद दिया और उन्हें अपना "बड़ा भाई" कहा। सरिका के लिए यह सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि आर्थिक आजादी का रास्ता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- दिल्ली में भाजपा ने भी लगाए थे राहुल गांधी जैसे आरोप, बिहार में ये काम क्यों नहीं कर रही कांग्रेस?

समाजसेवी का भावुक संदेश
डॉ. मुरारका, जो ‘एम्पल मिशन’ नामक एनजीओ चलाते हैं, ने कहा कि वे नहीं चाहते थे कि सरिका अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा किराए में देती रहें। उनका मानना है कि सबसे बड़ी खुशी आत्मनिर्भर होने में है, और उन्होंने यह उपहार इसी सोच से दिया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- साझा उम्मीदवार उतारने के लिए विपक्ष ने कसी कमर; साथी दलों से संपर्क करने में जुटे खरगे

नई शुरुआत, नई उम्मीदें
नए ऑटो की पहली सवारी डॉ. मुरारका को ही कराई गई। यह छोटी सी सवारी अंधेरी की गलियों में सरिका के लिए जीत और उम्मीद का सफर बन गई। अब वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर तरीके से कर पाएंगी, बल्कि बेटियों के भविष्य के लिए भी बचत कर सकेंगी। रक्षाबंधन का यह तोहफा उनके जीवन में स्थायी बदलाव लेकर आया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें