महाराष्ट्र सरकार ने सड़क पर रहने वाले बच्चों की मदद के लिए एक नई योजना शुरू करने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत राज्य भर में मोबाइल वैन चलाई जाएंगी। इन वैन में कार्यकर्ताओं की टीमें होंगी, जो बच्चों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श (काउंसलिंग) और शिक्षा की सुविधा देंगे।
महिला और बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि इस योजना की पायलट परियोजना पहले मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक और नागपुर में चलाई गई थी, जो कामयाब रही। इसके बाद अब इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि किसी भी बच्चे को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना सामाजिक अन्याय है। इस पहल का नाम 'मोबाइल स्क्वॉड' रखा गया है, जो बच्चों को शिक्षा, पोषण, इलाज और सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराएगी।
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टीमें सड़क पर रहने वाले बच्चों की करेंगी मदद
मोबाइल वैन की टीमें सड़क पर रहने वाले बच्चों और उनके माता-पिता से बातचीत करेंगी, बच्चों को स्कूलों में दाखिल करवाएंगी और अनाथ बच्चों या जिनके केवल एक अभिभावक हैं, उन्हें बाल देखभाल केंद्रों में भर्ती करेंगी। इसके अलावा, ये टीमें बच्चों की स्वास्थ्य जांच और इलाज करवाएंगी, नशा छोड़ने में मदद करेंगी, कुपोषण या दिव्यांगता से जूझ रहे बच्चों की देखभाल करेंगी और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने में मदद करेंगी। बड़ी उम्र के बच्चों के लिए थेरेपी और व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पायलट परियोजना के दौरान किया गया सर्वे
पायलट परियोजना के दौरान टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस) ने एक सर्वे किया था, जिससे पता चला कि छह जिलों में लगभग 70 हजार बच्चे सड़कों पर रह रहे हैं, जिनमें से 37,000 केवल मुंबई में थे। इनमें से 12 हजार बच्चों तक टीम पहुंची और 3,813 बच्चों को मोबाइल वैन की सेवाएं मिलीं। इन सेवाओं में स्वास्थ्य जांच, आधार कार्ड बनवाना, शिक्षा के लिए प्रेरित करना, स्कूल या आवासीय स्कूल में दाखिला करवाना और अनाथ बच्चों को बाल गृहों में भेजना शामिल था।
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नगर निगमों में 31 मोबाइल वैन भेजने की मंजूरी
राज्य सरकार ने अब 29 नगर निगमों में 31 मोबाइल वैन भेजने की मंजूरी दे दी है। इसका कुल बजट 8.06 करोड़ रुपये रखा गया है। इनमें से 3 वैन मुंबई में चलाई जाएंगी। अगले चरण में योजना का विस्तार नगर परिषदों और धार्मिक स्थलों तक किया जाएगा। मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि यह योजना सड़क पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास के जरिए एक बेहतर जीवन देने का मौका है।