शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि वह 16 सितंबर को औरंगाबाद में होने वाली सीएम शिंदे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बतौर पत्रकार शामिल होंगे। बता दें कि 16 सितंबर को महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक औरंगाबाद में होगी और कैबिनेट बैठक के बाद सीएम शिंदे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित करेंगे। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि अगर पुलिस इजाजत दे देगी तो वह बतौर पत्रकार सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहना चाहते हैं।
'देखना चाहता हूं सीएम कितना झूठ बोलेंगे'
एक मीडिया चैनल से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि 'महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक शनिवार को औरंगाबाद में होगी, अगर पुलिस मुझे इजाजत दे और मुझे ना रोके तो मैं सीएम शिंदे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बतौर पत्रकार शामिल होऊंगा।' राउत ने कहा कि 'मैं बस ये देखना चाहता हूं कि सीएम शिंदे कितना झूठ बोलते हैं।' राज्यसभा सांसद संजय राउत, शिवेसना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' के कार्यकारी संपादक हैं। बता दें कि हर साल 17 सितंबर को मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी मौके पर सीएम शिंदे ने औरंगाबाद में कैबिनेट की बैठक करने का फैसला किया है। दरअसल इसी दिन मराठवाड़ा का भारत में विलय हुआ था। जब भारतीय सेना ने 17 सितंबर 1948 को ही हैदराबाद के निजाम और उनकी रजाकार यूनिट को हराकर हैदराबाद पर कब्जा किया। जिसके बाद हैदाराबाद का हिस्सा रहा मराठवाड़ा क्षेत्र भी आजाद हुआ था।
औरंगाबाद में कैबिनेट की बैठक पैसों की बर्बादी
संजय राउत ने कहा कि 'हमें पता चला था कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह औरंगाबाद आने वाले हैं। वह हमें दिल्ली में नहीं मिलते तो हम शिव सैनिकों ने सोचा कि उनसे यहां मिलेंगे क्योंकि यह हमारी जमीन है, लेकिन उन्होंने अपना दौरा ही रद्द कर दिया है।' राज्य सरकार द्वारा औरंगाबाद में कैबिनेट की बैठक करने पर भी संजय राउत ने निशाना साधा और कहा कि यह फिजूलखर्ची है। सरकार ने इसके लिए होटल बुक किए हैं और किराए पर कारों की व्यवस्था की है। ये सब चीजें राज्य को पीछे लेकर जाएंगी। यह जनता के पैसे की बर्बादी है। संजय राउत ने सरकार पर अपने वादे पूरे ना करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि साल 2016 में मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए 49 हजार करोड़ रुपए के पैकेज का एलान किया गया था लेकिन उनमें से कितने वादे पूरे हुए? अब कहा जा रहा है कि सरकार एक और 40 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का एलान कर सकती है। सरकार को बताना चाहिए कि वह पहले के वादे कब पूरे करेगी।