महाराष्ट्र के सतारा जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव में भाजपा की प्रिय शिंदे की जीत ने महायुति सरकार में हलचल मचा दी। शिवसेना-एनसीपी गठबंधन के पास संख्या बल होने के बावजूद भाजपा ने चुनाव में बढ़त बनाई। ऐसे में अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कथित पुलिस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। हालांकि सीएम फडणवीस ने मामले की जांच का भरोसा दिया है।
महाराष्ट्र के सतारा जिले में हाल ही में हुए जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव ने महायुति सरकार की राजनीति में नया हलचल पैदा कर दी है। बीते शुक्रवार को हुए इस चुनाव में भाजपा की प्रिय शिंदे ने अध्यक्ष का पद जीत लिया, जबकि शिवसेना-एनसीपी गठबंधन के पास संख्या बल ज्यादा था। इस नाजुक चुनाव में भाजपा ने गठबंधन के कुछ सदस्यों को अपने पक्ष में खींचकर जीत हासिल की, जिससे सत्ता गठबंधन में मतभेद दिखाई देने लगी है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने सोमवार को कहा कि पिछले हफ्ते सतारा जिला परिषद के कुछ निर्वाचित सदस्यों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई लोकतंत्र की हत्या के समान है।
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पुलिस कार्रवाई पर क्यों भड़के शिंदे?
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उन्हें बताया गया कि एक निर्वाचित सदस्य पर पुराने मामले का आरोप दर्ज था। उन्होंने तत्काल सतारा एसपी तुषार दोशी से संपर्क किया, जिन्हें उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी निर्वाचित सदस्य को मतदान से रोकना लोकतंत्र के खिलाफ है।
शिंदे ने आगे कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया था, लेकिन स्थानीय पुलिस ने चुनाव के समय सदस्यों को हटाकर कार्रवाई की। उन्होंने इसे चुनाव के परिणाम को बदलने के प्रयास के रूप में बताया।हालांकि विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने इस घटना के बाद सतारा एसपी तुषार दोशी को निलंबित करने का निर्देश दिया।
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