सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि पहले नागरिकों को अपने आवेदन जमा करने और अपने मुद्दों को हल करने के लिए मुंबई में राज्य सचिवालय जाना पड़ता था। संभागीय सीएम सचिवालय कार्यालयों की स्थापना से उनका समय और प्रयास बच गया।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों को लोगों की शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए अपने-अपने जिलों में मुख्यमंत्री सचिवालय प्रकोष्ठ स्थापित करने का निर्देश दिया है।
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इस संबंध में एक सरकारी संकल्प (जीआर) शुक्रवार को जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री सचिवालय प्रकोष्ठ पहले मंडल स्तर पर स्थापित किए गए थे, लेकिन इस सुविधा को आगे जिला स्तर तक बढ़ाया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को पेश आ रही समस्याओं का तुरंत समाधान किया जा सके।
सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि पहले नागरिकों को अपने आवेदन जमा करने और अपने मुद्दों को हल करने के लिए मुंबई में राज्य सचिवालय जाना पड़ता था। संभागीय सीएम सचिवालय कार्यालयों की स्थापना से उनका समय और प्रयास बच गया। अब इस काम को और आसान बनाने और इसे और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए जिला स्तरीय प्रकोष्ठ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें कहा गया है कि जिले के रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर सेल का नेतृत्व करेंगे और नायब तहसीलदार इस कार्य में उनकी सहायता करेंगे।
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कोकण विकास प्राधिकरण के गठन का विरोध
महाराष्ट्र में मराठवाड़ा क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रहे एक संगठन ने राज्य के तटीय जिलों के लिए कोकन विकास प्राधिकरण (केडीए) बनाने के फैसले को लेकर एकनाथ शिंदे नीत सरकार की आलोचना की है। 'मराठवाड़ा अनुशेष निर्मूलन आनी विकास मंच' के अध्यक्ष डॉ. संजय पाटिल ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार की केडीए बनाने की घोषणा नागपुर समझौते का उल्लंघन है।