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Maharashtra Politics: शिंदे सरकार के राज में पीएम मोदी की बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लगेंगे पंख, जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ा रोड़ा

सार

महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद से रेलवे अधिकारियों की उम्मीद भी बढ़ गई हैं। रेलवे के अफसरों को उम्मीद है कि राज्य के मुख्यमंत्री की टेबल पर भूमि अधिग्रहण की अटकी पड़ी फाइल अब आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही सुरंग बनाने के लिए एक पेट्रोल पंप को स्थानांतरित किया जाएगा और मुख्य जमीन के भुगतान का निपटारा किया जाएगा।
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Maharashtra Crisis - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र की सरकार में निजाम बदलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के काम में तेजी आने की उम्मीद है। नई सरकार का फोकस अब राज्य की करीब 150 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण पर होगा। साथ ही शिंदे सरकार पहले से अधिग्रहीत जमीन पर तेजी से काम शुरू करने के लिए मोदी सरकार के साथ तालमेल स्थापित कर सकेगी। गुजरात में पड़ने वाले 352 किलोमीटर के खंड के साथ-साथ दादरा और नगर हवेली वाले खंड पर बुलेट ट्रेन का काम शुरू हो गया है।  

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उद्धव सरकार के रवैये के कारण बढ़ाना पड़ी तारीख
अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन उद्धव सरकार के रवैये के कारण बुलेट ट्रेन परियोजना की समय सीमा 2023 से बढ़ाकर 2026 कना पड़ी। ठाकरे सरकार लगातार इस प्रोजेक्ट में रोड़े अटका रही थी। इसलिए इस प्रोजेक्ट यह करीब 3 साल पीछे चले गया। नवंबर 2020 में प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान भी पीएम मोदी ने उद्धव ठाकरे से 30 अप्रैल 2021 तक इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के मसले पर तेजी लाने और सौंपने के लिए कहा था, लेकिन उद्धव सरकार ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद पीएम ने निर्देश दिया था कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को पहले गुजरात में चालू किया जाए।

अफसरों को उम्मीद मुख्यमंत्री जल्द करेंगे फैसला
महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद से रेलवे अधिकारियों की उम्मीद भी बढ़ गई हैं। रेलवे के अफसरों को उम्मीद है कि राज्य के मुख्यमंत्री की टेबल पर भूमि अधिग्रहण की अटकी पड़ी फाइल अब आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही सुरंग बनाने के लिए एक पेट्रोल पंप को स्थानांतरित किया जाएगा और मुख्य जमीन के भुगतान का निपटारा किया जाएगा। दरअसल, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 508 किलोमीटर की है। इसे 1.1 ट्रिलियन रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में इसके 12 स्टेशन होंगे। सूत्रों से जानकारी के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद परियोजना के लिए महाराष्ट्र में 432 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन इसका क्रियान्वयन कर रही कंपनी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने अब तक 312 हेक्टेयर भूमि का ही अधिग्रहण किया है। तत्कालीन ठाकरे सरकार की अटकाने वाली नीति के कारण बाकी जमीन को अधिग्रहण करने में कंपनी को बहुत परेशानी आ रही थी।
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शिंदे सरकार से बढ़ी उम्मीदें
हाल ही में मीडिया से चर्चा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा कि राज्य में कई प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। प्रोजेक्ट जितने डिले होते हैं, उतनी कॉस्ट बढ़ती है और लोगों को कोई फायदा नहीं होता है। जितने भी प्रोजेक्ट प्रलंबित हैं, उसे आगे हम बढ़ाएंगे और लोगों को जल्द से जल्द इन प्रोजेक्ट का फायदा मिले, ऐसी इस सरकार की जिम्मेदारी होगी। नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में पिछली सरकार के आरे में मेट्रो 3 कार शेड के निर्माण पर रोक लगाने और इसे 102 एकड़ के कांजुरमार्ग प्लॉट में स्थानांतरित करने के फैसले को पलट दिया। इस वजह से बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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