मलिक ने महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में मंत्री रहते हुए भाजपा के खिलाफ हमले का नेतृत्व किया था। हालांकि, जब उन्हें स्वास्थ्य आधार पर रिहा किया गया तो उन्हें मीडिया से बात करने से रोक दिया गया। इसलिए उनका रुख स्पष्ट नहीं था। हालांकि, चुनाव आयोग के समक्ष पेश की गई समर्थकों की सूची में उनकी स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी।
मलिक को दाऊद इब्राहिम की बहन के साथ कथित लेन-देन के मामले में जेल भेजा गया था। पार्टी के विभाजन के दौरान वह जेल में थे। अजीत पवार ने उनकी रिहाई की कोशिश की और इसलिए यह अनुमान लगाया गया कि वह अजित पवार गुट का साथ देंगे। चुनाव आयोग को सौंपी गई सूची से इन अटकलों की पुष्टि हुई है।
वहीं, नवाब मलिक द्वारा अजित पवार गुट को समर्थन देने की खबरों पर राकांपा (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल ने कहा, 'मुझे नहीं पता... हमारे पास जानकारी नहीं है। अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है, और उनके मीडिया से बात करने पर रोक लगा दी गई है। इसलिए उन्होंने कोई राजनीतिक बयान नहीं दिया है। हमारे पास इस बात की जानकारी नहीं है कि उन्होंने किसी को हलफनामा दिया है या नहीं।'