पूर्व MLA संग्राम थोपटे ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा
- फोटो : X / @SangramThopate
महाराष्ट्र के पुणे जिले में भोर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व विधायक संग्राम थोपटे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वहीं उनके भाजपा में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि, संग्राम थोपटे भोर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं। जबकि उनका परिवार कांग्रेस की परंपरा से जुड़ा है, पार्टी के दिग्गज अनंतराव थोपटे के बेटे हैं, जिन्होंने छह बार भोर का प्रतिनिधित्व किया था।
यह भी पढ़ें -
मुर्शिदाबाद: धुलियान में पीड़ितों से बिना मिले जा रहे थे राज्यपाल बोस, ग्रामीणों के हंगामे के बाद की मुलाकात
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपा इस्तीफा
संग्राम थोपटे ने बताया, 'मैंने अपना इस्तीफा राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला को सौंप दिया है।' उन्होंने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया और अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपनी कवर इमेज से कांग्रेस का लोगो हटा दिया। अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर संग्राम थोपटे ने कहा कि वह रविवार को अपने समर्थकों के साथ चर्चा करेंगे।
परिवार की विरासत को आगे बढ़ाएं संग्राम- सपकाल
वहीं संग्राम थोपटे के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'अनंतराव थोपटे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। थोपटे परिवार की कांग्रेस की विरासत लंबे समय से चली आ रही है। संग्राम थोपटे को उस विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए।' इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि जब एमवीए सत्ता में थी, तब नाना पटोले के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस संग्राम थोपटे को विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतारना चाहती थी, लेकिन (तत्कालीन विपक्षी नेता) देवेंद्र फडणवीस ने तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर दबाव बनाकर उनके प्रयासों को विफल कर दिया। उन्होंने कहा, 'फडणवीस ने कोश्यारी पर अध्यक्ष का चुनाव टालने का दबाव बनाया। नतीजतन, थोपटे पद ग्रहण नहीं कर सके।'
यह भी पढ़ें -
West Bengal: मुर्शिदाबाद के धुलियान में हिंसा पीड़ितों से मिलीं महिला आयोग की सदस्य, फूट-फूटकर रोईं पीड़िताएं
हर्षवर्धन सपकाल का बड़ा दावा
फरवरी 2021 में नाना पटोले के इस्तीफा देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष का पद खाली हो गया था। जुलाई 2022 में भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर अध्यक्ष बने। हर्षवर्धन सपकाल ने आगे दावा किया कि अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी के कारण अंततः शिवसेना में राजनीतिक विभाजन हुआ।
फडणवीस ने थोपटे के साथ गलत किया- सपकाल
हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा, 'अगर थोपटे स्पीकर बन जाते, तो इस राजनीतिक परिदृश्य से बचा जा सकता था। फडणवीस ने ही थोपटे के साथ गलत किया। उन्हें फडणवीस के प्रभाव में नहीं आना चाहिए, जिन्होंने उनकी चुनावी हार सुनिश्चित की।' दिसंबर 2024 में 15वीं महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में राहुल नार्वेकर को निर्विरोध चुना गया, क्योंकि विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था।