मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के वकील पेश नहीं हो सके। इसके बाद मराठा क्रांति दल सरकार के प्रति आक्रामक हो गया है। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने भी ठाकरे सरकार पर जमकर हमला बोला है।
सुप्रीम कोर्ट में मराठा आरक्षण पर सुनवाई चार हफ्ते के लिए टल गई है। मराठा आरक्षण को लेकर गठित मंत्रिमंडल की उपसमिति के अध्यक्ष व पीडब्लूडी मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि तकनीकी कारणों से राज्य सरकार के वकील सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं रह सके। राज्य सरकार चाहती थी कि मामले की सुनवाई एक संवैधानिक पीठ के माध्यम से की जाए।
इसलिए राज्य सरकार ने मामले को संवैधानिक पीठ के लिए सात अक्तूबर को याचिका भी दी थी जिसे अदालत ने अपने पास रख लिया था। फिलहाल, मराठा आरक्षण पर स्टे लगा है। हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम स्टे हटाए।
छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज भाजपा सांसद संभाजी राजे ने राज्य सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अगर संवैधानिक पीठ में सुनवाई करानी थी तो डेढ़ महीने का समय फालतू क्यों व्यर्थ किया। डेढ़ महीने पहले ही राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना मत क्यों नहीं रखा। संभाजी राजे ने कहा कि महाराष्ट्र का मराठा समुदाय ओबीसी में नहीं बल्कि आर्थिक और समाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की श्रेणी में आरक्षण चाहता है।
मराठा आरक्षण नहीं देना चाहती महा आघाडी सरकारः पाटील
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि राज्य की शिवसेना, एनसीपी व कांग्रेस की महाविकास आघाड़ी सरकार मराठा आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकार मराठा आरक्षण देना ही नहीं चाहती। यह बात आज सुप्रीम कोर्ट में साबित हो गई। राज्य सरकार की इस भूमिका से केवल मराठा समाज प्रभावित नहीं होगा बल्कि पुरे राज्य को परेशानी होगी।
कोल्हापुर में पत्रकारों से बातचीत में पाटील ने कहा कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मराठा आरक्षण पर सुनवाई थी। लेकिन सरकार के वकील समय पर कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इस पर अदालत ने नाराजगी भी जताई। यह चिंताजनक बात है। मराठा आरक्षण के चलते पूरे महाराष्ट्र में अनिश्चितता का माहौल है। 11वीं कक्षा और मेडिकल में प्रवेश प्रक्रिया भी रुकी हुई है।