महाराष्ट्र के सांगली जिले की एक कोर्ट ने 14 साल पुराने एक मामले में मनसे प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। 2008 में ठाकरे पर कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में आईपीसी की धारा 109 और 117 (अपराध के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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छह अप्रैल को गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए, सांगली जिले के शिराला में न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी ने मुंबई पुलिस आयोग को मनसे प्रमुख को गिरफ्तार करने और अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। यह वारंट उनके खिलाफ दर्ज 2008, यू/एस भादंवि 143, धारा 109, 117 और बॉम्बे पुलिस एक्ट की धारा 135 व अन्य के तहत केस को लेकर जारी किया गया है।
सहायक लोक अभियोजक ज्योति पाटिल ने कहा कि न्यायाधीश ने ठाकरे और एक अन्य मनसे नेता शिरीष पारकर के खिलाफ क्रमशः मुंबई पुलिस आयुक्त और खेरवाड़ी पुलिस स्टेशन के माध्यम से वारंट जारी किया क्योंकि ठाकरे कार्यवाही के दौरान अदालत के सामने पेश नहीं हुए। अदालत ने पुलिस से आठ जून से पहले वारंट लागू करने और दोनों नेताओं को अदालत में पेश करने को कहा है।
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बता दें, 2008 में मनसे कार्यकर्ताओं ने स्थानीय युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता देने के लिए एक आंदोलन में ठाकरे की गिरफ्तारी के खिलाफ शिराला में विरोध प्रदर्शन किया था।
मनसे के एक स्थानीय पदाधिकारी ने दावा किया कि एक सरकारी नियम है जिसमें कहा गया है कि 2012 से पहले के राजनीतिक मामलों को वापस ले लिया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले को उठाया जा रहा है क्योंकि ठाकरे ने मस्जिदों के ऊपर लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाया है।