महाराष्ट्र के विधायकों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट अप्रैल के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा। अदालत ने सभी पक्षकारों से कहा कि एक अप्रैल या उससे पहले अपना जवाब दाखिल करें। याचिका पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने दायर की है।
महाराष्ट्र में विधायकों की अयोग्यता का मामला लगातार चर्चा में है। ताजा घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है। विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग पर विधानसभा स्पीकर के फैसले के खिलाफ पूर्व मुथ्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे या यूबीटी) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि इस मामले में अप्रैल के दूसरे हफ्ते में सुनवाई होगी। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पक्षकारों को एक अप्रैल या उससे पहले अपना जवाब दाखिल करना होगा।
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स्पीकर ने शिकायत पर एक्शन नहीं लिया
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी गई है। पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के खेमे का कहना है कि स्पीकर ने उनकी अपील के आधार पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे के विधायकों की अयोग्यता वाली याचिका पर विधायकों की सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई नहीं की
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गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने जून 2022 में विभाजन के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के गुट को वास्तविक शिवसेना घोषित किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विधानसभाध्यक्ष ने शिंदे सहित सत्तारूढ़ खेमे के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की ठाकरे गुट की याचिका को भी खारिज कर दिया था। अयोग्यता याचिकाओं पर अपने फैसले में 10 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिद्वंद्वी खेमों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया था। इस फैसले ने मुख्यमंत्री के रूप में शिंदे की स्थिति को और मजबूत कर दिया। शिंदे ने 18 महीने पहले ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। गर्मियों में लोकसभा चुनाव और 2024 की दूसरी छमाही में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन में इस फैसले से उनकी राजनीतिक ताकत बढ़ गई है।