दोहरे लाभ पाने वाले धर्मांतरित आदिवासियों के मुद्दे पर महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने महाराष्ट्र विधान परिषद में कहा कि राज्य सरकार उन आधिवासियों को सूची में हटाने की मांग का अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाएगी, जिन्हें दूसरे धर्म में परिवर्तित होने के बाद दोहरा लाभ मिलता है। उन्होंने विधान परिषद में बोलते हुए कहा कि जो आदिवासी धर्म परिवर्तन करते है उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य और अनुसूचित जनजाति के सदस्य के रूप में भी लाभ मिलता है। बता दें दावा किया गया कि कई आदिवासियों को जबरदस्ती और प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरित किया जा रहा है। इस तरह कि चीजें आदिवासी संस्कृति को खोखला कर देता है।
'धर्मांतरण के बाद भी ले रहे कई आदिवासी लाभ'
कौशल विकास और रोजगार मंत्री लोढ़ा ने कहा कि ऐसे दोहरे लाभ पाने वाले व्यक्तियों को सूची से हटाने के मुद्दे का अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल होंगे। बता दें मंत्री लोढ़ा भाजपा विधायक निरंजन डावखरे, प्रवीण दरेकर द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब दे रहे थे। जिसमें कहा गया था कि इस्लाम, ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को एसटी सूची से हटाने और उनके लिए आरक्षण लाभ वापस लेने की मांग की गई है।
कांग्रेस-भाजपा की जमकर बहस
इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान भाजपा एमएलसी और कांग्रेस के कपिल पाटिल के बीच जोरदार बहस हुई। पाटिल ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को यह तय करने का अधिकार है कि उन्हें किसकी पूजा करनी चाहिए और आरोप लगाया कि प्रस्तावित सूची से हटाने से धार्मिक भेदभाव होगा। उन्होंने कहा कि अगर आदिवासी हिंदू धर्म अपनाते हैं, तो यह स्वीकार्य हो जाता है लेकिन अगर वे इस्लाम, ईसाई धर्म या बौद्ध धर्म अपनाते हैं तो इसे अस्वीकार्य माना जाता है।
वहीं मंत्री लोढ़ा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ चर्चा करेंगे और जल्द ही सदन को सूचित करेंगे।