महाराष्ट्र में अब मेडिकल और दंत चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले मराठा छात्रों को स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाओं में 16 फीसदी आरक्षण मिलेगा। महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों में शुक्रवार को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए (एसईबीसी) अधिनियम 2018 के तहत एक संशोधन पारित किया गया।
भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने इससे पहले नवंबर 2018 में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों में आने वाले मराठाओं के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16 फीसदी आरक्षण के लिए अध्यादेश जारी किया था। तब अनारक्षित वर्ग के छात्रों ने इसे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी थी। कोर्ट ने आरक्षण खत्म कर दिया और इस आरक्षण को असंवैधानिक कहा। मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो वहां भी अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
साथ ही कहा कि इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के अलावा कोई भी कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। ऐसे में सरकार ने कोई नया अध्यादेश लाने के बजाय एसईबीसी अधिनियम 2018 में ही एक संशोधन करके मराठा छात्रों के लिए चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा की स्नातकोत्तर कक्षाओं में 16 प्रतिशत आरक्षण दे दिया। अब इस संशोधन को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा और उनके हस्ताक्षर के साथ यह अधिनियम प्रभावी हो जाएगा।