महाराष्ट्र सरकार ने मनोधैर्य योजना के तहत एक महिला को दी गई वित्तीय सहायता वापस लेने का फैसला लिया है, क्योंकि महिला ने मुकदमे के दौरान अपनी गवाही से मुकरते हुए आरोपी को बरी करवा दिया। बता दें कि मामला 2017 का है जब एक 40 वर्षीय महिला ने अपने देवर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे मनोधर्य योजना के तहत सरकारी सहायता का लाभ मिलने लगा था। मनोधैर्य योजना को 2013 में महाराष्ट्र सरकार ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न और एसिड हमलों के पीड़ितों को वित्तीय सहायता और पुनर्वास प्रदान करने के लिए शुरू किया था।
डीएलएसए सचिव ने दी जानकारी
मामले में डीएलएसए सचिव ईश्वर सूर्यवंशी ने बताया कि महिला ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपनी गवाही से मुकरते हुए अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया, जिसके कारण आरोपी को बरी कर दिया गया। इसके बाद महिला ने डीएलएसए से 75,000 रुपये की एफडी परिपक्वता से पहले वापस लेने की मांग की।
साथ ही सूर्यवंशी ने आगे कहा कि मामले में नीति के अनुसार, पीड़ितों को अभियोजन पक्ष के साथ सहयोग करना चाहिए और अपनी गवाही में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। कोई भी विचलन होने पर सरकार को राशि वापस लेने का अधिकार होता है। इसके बाद, जिला न्यायालय ने फैसला सुनाया कि महिला को दी गई 1 लाख रुपये की सहायता राशि वापस ली जाए। डीएलएसए ने महिला को इस संबंध में नोटिस जारी किया है।
एक नजर पूरे मामले पर
गौरतलब है कि 40 वर्षीय महिला ने 2017 में अपने देवर पर बलात्कार का आरोप लगाया था, जबकि उसका पति मानसिक बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में था। महिला ने कल्याणी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया और 2022 में उसे मनोधैर्य योजना के तहत 25,000 रुपये की सहायता मिली, जबकि 75,000 रुपये की राशि उसके नाम पर सावधि जमा में रखी गई थी।