विशेषाधिकार समिति में तीन विधायक एनसीपी के हैं, दो विधायक कांग्रेस के, दो विधायक निर्दलीय, दो विधायक सत्ताधारी शिवसेना के और छह विधायक भाजपा के शामिल किए गए हैं।
संजय राउत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन मामले में महाराष्ट्र विधानसभा में विशेषाधिकार समिति के गठन का विरोध शुरू हो गया है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता अजित पवार ने गुरुवार को कहा कि विशेषाधिकार समिति का गठन नियमों के मुताबिक नहीं किया गया है। अजित पवार ने फिर से विशेषाधिकार समिति के गठन की मांग की है। महाराष्ट्र विधानसभा के सभापति राहुल नार्वेकर ने बुधवार को 15 सदस्यीय विशेषाधिकार समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता भाजपा विधायक राहुल कुल करेंगे।
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शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत पर आरोप है कि उन्होंने विधिमंडल को कथित तौर पर चोर मंडल कहा। जिसे लेकर संजय राउत के खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा में विशेषाधिकार के उल्लंघन का नोटिस दिया गया। इस पर सभापति राहुल नार्वेकर ने बताया कि उन्हें संजय राउत के खिलाफ नोटिस मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। अब संजय राउत के खिलाफ जांच की जाएगी।
अजित पवार की मांग- विशेषाधिकार समिति का हो पुनर्गठन
बता दें कि विशेषाधिकार समिति में तीन विधायक एनसीपी के हैं, दो विधायक कांग्रेस के, दो विधायक निर्दलीय, दो विधायक सत्ताधारी शिवसेना के और छह विधायक भाजपा के शामिल किए गए हैं। खास बात ये है कि विशेषाधिकार समिति में उद्धव ठाकरे गुट के किसी विधायक को जगह नहीं दी गई है। अजित पवार ने बताया कि राउत के खिलाफ विधायक अतुल भटकलकर ने नोटिस दिया है, जो कि खुद विशेषाधिकार समिति के सदस्य हैं। अजित पवार ने विधानसभा में कहा कि विशेषाधिकार समिति का पुनर्गठन किया जाना चाहिए और इसका मौजूदा स्वरूप नियमों के लिहाज से ठीक नहीं है और यह न्यायसंगत भी नहीं है।
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क्या बोले शरद पवार
एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी विशेषाधिकार समिति के गठन पर असंतोष जाहिर किया है। पवार ने ट्वीट करते हुए लिखा कि शिकायतकर्ताओं को ही न्याय देने की जिम्मेदारी दे दी गई है। जिन सदस्यों ने संजय राउत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, वह ही विशेषाधिकार समिति का हिस्सा हैं। ऐसे में न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है। पवार ने कहा कि संजय राउत के बयान को समग्रता में देखा जाना चाहिए। पवार ने कहा कि विशेषाधिकार समिति में निष्पक्ष और वरिष्ठ सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए था। साथ ही कोई भी फैसला लेने से पहले संजय राउत को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए। संजय राउत के बयान पर विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने मामले की जांच कराकर आठ मार्च को फैसला देने की बात कही है।