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महाराष्ट्र: सियासी संकट में सरकार गठन के ये चार समाधान, अब सबकुछ राज्यपाल पर निर्भर

Fri, 08 Nov 2019 08:55 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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देवेंद्र फडणवीस-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का नतीजा आए पखवाड़ा बीतने के बावजूद सरकार नहीं बनी है। बृहस्पतिवार को भी भाजपा नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से सिर्फ मुलाकात की, सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया।

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वहीं, विधायक दल की बैठक के बाद शिवसेना ने भाजपा को सरकार बनाने की चुनौती दी और अपने विधायकों को मुंबई के एक होटल में भेज दिया। यहां जानिए इस सारे सियासी ड्रामे के बाद सरकार गठन के लिए आखिर अब क्या विकल्प बचे हैं।

सरकार गठन के अब क्या विकल्प

1- कोई एक झुके : शिवसेना-भाजपा में से कोई एक जिद छोड़े तो बनेगी गठबंधन सरकार।

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2- अल्पमत सरकार : 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 105 विधायक हैं। बहुमत के लिए 145 विधायक चाहिए। भाजपा निर्दलीय सहित अन्य 29 विधायकों को साथ कर ले तो संख्या 134 हो जाएगी। बहुमत परीक्षण के दौरान सदन से विरोधी दलों के 21 विधायक गैरहाजिर रहें तो संख्या 267 होगी और बहुमत का जरूरी आंकड़ा 134 हो जाएगा। हालांकि भाजपा ने इससे इनकार किया है।
3- शिवसेना में टूट : 56 विधायकों वाली शिवसेना के 45 विधायक टूटकर भाजपा का साथ दें तो संख्या दो-तिहाई से ज्यादा होगी। दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। भाजपा की संख्या 150 हो जाएगी। हालांकि भाजपा ने इससे इनकार किया है।
4- नया गठबंधन : शिवसेना (56)  एनसीपी (54) के साथ गठबंधन सरकार बनाए। कांग्रेस (44) बाहर से समर्थन दे। ऐसे में आंकड़ा 154 होगा।

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इसके अलावा आगे क्या?

1- सियासी संकट के बीच यदि किसी दल ने दावा पेश नहीं किया तो प्रदेश के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता देंगे। यह कहना है राज्य विधानसभा के पूर्व प्रधान सचिव अनंत काले का।

उनके अनुसार, किसी दल ने दावा पेश नहीं किया तो राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। वह पार्टी सरकार नहीं बनाती है तो दूसरे सबसे बड़े दल को मौका मिलेगा। राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले यह औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
 
2- राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने गुरुवार को राज्यपाल कोश्यारी से मुलाकात की थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उन्होंने राज्यपाल को कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर सलाह दी। अपनी शक्तियों का प्रयोग करने और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार स्थिर सरकार बनाने के लिए संभावनाओं का पता लगाने के लिए जानकारी दी। ऐसे में इस सियासी संकट के समाधान में अब सबकुछ राज्यपाल कोश्यारी पर निर्भर करता है।

महाराष्ट्र विधानसभा; कुल सीटें 288, बहुमत 145

भाजपा 105

शिवसेना 56

राकांपा 54

कांग्रेस 44

अन्य 29

विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर तक, उसके बाद

मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर को खत्म हो रहा है। नई विधानसभा का सत्र बुलाने का फैसला कैबिनेट की पहली बैठक में होता है। विधानसभा के पूर्व सचिव अनंत काले ने कहा कि संविधान में कार्यवाहक सरकार का जिक्र नहीं है। इसके बाद राष्ट्रपति शासन के विकल्प पर विचार हो सकता है। हालांकि, महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि एनी ने कहा, राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा से पहले बहुत विकल्प हैं।

कांग्रेस विधायक चाहते हैं शिवसेना बनाए सरकार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में चुनाव जीते कांग्रेस के कुछ विधायक शिवसेना को समर्थन देने के इच्छुक हैं। पार्टी आलाकमान भले ही शिवसेना से दूरी बनाना चाह रहा है, पर इन विधायकों का मानना है कि शिवसेना को सरकार बनाने में मदद दी जानी चाहिए। ये चार विधायक इसी सिलसिले में दिल्ली भी पहुंच गए। लेकिन राज्य प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव संगठन केसी. वेणुगोपाल दिल्ली में नहीं थे, इसलिए मुलाकात नहीं हो सकी।

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शिवसेना और कांग्रेस दोनों ही सतर्क

वहीं दूसरी ओर शिवसेना के अपने विधायकों को होटल भेजने के बाद कांग्रेस भी अपने विधायकों को लेकर सतर्क है। राज्य के वरिष्ठ नेताओं को अपने प्रभाव वाले विधायकों से संपर्क में रहने को कहा गया है। हालांकि कांग्रेस नेता ऐसे किसी खतरे से इंकार कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी तभी अपने पत्ते खोलेगी जब भाजपा के अतिरिक्त वहां कोई सरकार बनती दिखेगी।

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