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महाराष्ट्र: फडणवीस सरकार ने आदिवासी छात्रों की सभी मांगें मानीं, भूख हड़ताल खत्म करने की अपील; जानें सब कुछ

Sat, 29 Aug 2026 08:13 PM IST
पवन पांडेय पीटीआई, मुंबई

सार

इससे पहले शनिवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार को भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। वहीं, सरकार की ओर से मांगें स्वीकार किए जाने के बाद छात्रों की भूख हड़ताल शनिवार को ही खत्म होने की उम्मीद है।
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देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार ने तीन शहरों में भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों की सभी प्रमुख मांगों को मानने का एलान किया है। राज्य के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने शनिवार को बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। सरकार ने छात्रों से भूख हड़ताल खत्म कर पढ़ाई पर लौटने की अपील की है। आदिवासी छात्रों का आंदोलन पुणे, नागपुर और नासिक में चल रहा था। यह आंदोलन गढ़चिरौली जिले के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत के बाद शुरू हुआ था। छात्रों ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों की भर्ती और आदिवासी बच्चों के लिए चलाए जा रहे आवासीय स्कूलों की व्यवस्था सुधारने समेत कई मांगें उठाई थीं।
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तीन महीने बाद फिर होगी समीक्षा बैठक
मंत्री अशोक उइके ने बताया कि मुख्यमंत्री ने छात्रों को भरोसा दिया है कि तीन महीने बाद दोबारा बैठक होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि सरकार ने जिन फैसलों का ऐलान किया है, उन्हें लागू करने में कोई परेशानी तो नहीं आ रही है। सरकार की ओर से ST उम्मीदवारों की सरकारी भर्ती से जुड़ी मांग पर भी फैसला लिया गया है। छात्रों की मांग थी कि संबंधित सरकारी आदेश के अनुसार प्वाइंट रोस्टर में ST को दूसरे स्थान पर रखा जाए। इसके लिए सरकार ने पहले ही एक समिति बना दी है। समिति की सिफारिश तीन महीने के भीतर आने की उम्मीद है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

PESA के तहत भर्ती में तेजी
मंत्री ने बताया कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) कानून यानी PESA और गैर-PESA क्षेत्रों में भर्ती को लेकर भी चर्चा हुई है। PESA के तहत आने वाले 17 कैडर में से 9 में भर्ती पूरी हो चुकी है। बाकी कैडर में भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। ST उम्मीदवारों के लिए सुपरन्यूमेरेरी यानी अतिरिक्त पद बनाने की मांग पर भी चर्चा हुई। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 6 जुलाई 2017 के फैसले के संदर्भ में उठाया गया था। सरकार तीन महीने के भीतर ऐसे पदों की संख्या तय करेगी और छह महीने में प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
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12,500 पदों पर भर्ती का मुद्दा
छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी मांग 12,500 पदों पर भर्ती की थी। सरकार ने इन पदों को भरने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम देने पर सहमति जताई है। छात्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि तीन महीने के भीतर खाली पदों की पहचान कर ली जाएगी। इसके अलावा उन लोगों की नियुक्तियों का मुद्दा भी उठाया गया, जिन्होंने जाति वैधता प्रमाण पत्र के बिना सरकारी नौकरी हासिल की है। छात्रों का दावा है कि 2018, 2019 और 2020 में नियुक्त कुछ उम्मीदवारों ने छह महीने के भीतर वैधता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया, फिर भी वे नौकरी कर रहे हैं। छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया है कि रविवार से ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू होगी और जहां जरूरी होगा, संबंधित कर्मचारियों को सेवा से हटाया जाएगा।

DBT योजना रद्द, सेंट्रल किचन पर समिति
छात्रों ने बताया कि सरकार ने उनकी मांग के अनुसार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना को भी शनिवार को रद्द कर दिया है। आदिवासी आवासीय स्कूलों में लागू सेंट्रल किचन सिस्टम को लेकर भी समिति बनाई गई है। समिति की रिपोर्ट 15 दिन से एक महीने के भीतर आने की उम्मीद है। इसके बाद मुख्यमंत्री इस व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला लेंगे। वहीं, सरकार ने आदिवासी बच्चों के लिए चलाए जा रहे सरकारी और सहायता प्राप्त आवासीय स्कूलों की कमियों का पता लगाने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। ऑडिट में सामने आने वाली कमियों पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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छात्रों ने आंदोलन में समर्थन देने वालों को धन्यवाद दिया
सरकार के साथ बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस फैसले से संतुष्ट हैं, क्योंकि उन्हें अपनी मांगों को पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम मिला है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, NCP (SP) नेता रोहित पवार, महाराष्ट्र कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर और NSUI समेत आंदोलन का समर्थन करने वालों का आभार जताया। छात्रों ने कहा कि मीडिया में मुद्दा प्रमुखता से आने के बाद सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान दिया।
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