हलफनामे में महाराष्ट्र गृह विभाग के संयुक्त सचिव वेंकटेश माधव ने कहा है कि याचिकाकर्ता (परमबीर सिंह) को व्हिसलब्लोअर नहीं माना जा सकता है। याचिकाकर्ता के 20 मार्च 2021 के पत्र से साफ होता है कि उन्होंने कथित भ्रष्टाचार के जो मामले बताए वह मार्च से कुछ महीने पहले हुए थे। लेकिन उन्होंने ये आरोप 20 मार्च को लगाए, अपने ट्रांसफर के तीन दिन बाद।
माधव ने आगे कहा कि ऐसे में उनका पत्र जनहित या वास्तविक उद्देश्य के लिए नहीं था। इसलिए इस बात से इनकार किया जाता है कि याचिकाकर्ता एक व्हिलसब्लोअर है। 83 पन्नों के अपने जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि हाल ही में निलंबित किए गए परमबीर सिंह इस याचिका के जरिए अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जांच को रोकना चाहते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े धनशोधन मामले की जांच में मुंबई के निलंबित पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का बयान दर्ज किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सिंह का बयान तीन दिसंबर को ईडी के दक्षिण मुंबई स्थित कार्यालय में दर्ज किया गया था। इस दौरान सिंह से करीब पांच घंटे तक इस मामले के जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की गई थी।
ईडी की ओर से सिंह को तीन बार समन भेजा जा चुका था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे। सूत्रों के अनुसार एजेंसी उन्हें फिर समन भेज सकती है। 1988 बैच के आईपीएसअधिकारी सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। वसूली के आरोप में सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर हुई है।