सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई, 2021 को महाराष्ट्र में कॉलेज प्रवेश और नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि समग्र आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा के उल्लंघन को सही ठहराने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी।
मराठा आरक्षण मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। सीएम एकनाथ शिंदे ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण को लेकर शीर्ष अदालत में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मराठा समुदाय के पिछड़ेपन का पता लगाने के लिए नए सिरे से सर्वेक्षण करने के लिए भी एक नए आयोग का गठन किया जाएगा।
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सीएम एकनाथ शिंदे के कार्यालय से इसे लेकर एक बयान भी जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद भी मराठा आरक्षण मामले में दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। शिंदे ने कहा, सुधारात्मक याचिका दायर करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू होनी चाहिए। नए व्यापक सर्वेक्षण को वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जाना चाहिए। इसमें कुशल, गैर-पक्षपाती संगठनों को शामिल किया जाए जिन्हें मानव संसाधन के साथ-साथ सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई, 2021 को महाराष्ट्र में कॉलेज प्रवेश और नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि समग्र आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा के उल्लंघन को सही ठहराने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी। राज्य सरकार ने इसके बाद पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी जिसे बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया गया।