महाराष्ट्र सरकार अशोक खरात मामले में सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इस बीच एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह बड़ी कार्रवाई एक तथाकथित और ढोंगी बाबा के साथ इस अधिकारी के गहरे संबंधों के उजागर होने के चलते की गई। इस साल की शुरुआत में जब इस बाबा के काले कारनामों का पर्दाफाश हुआ था, तब पूरे राज्य की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मच गया था। अब इस पूरे मामले में दागी अधिकारियों पर यह पहला सबसे बड़ा और कड़ा एक्शन लिया गया है।
सरकार ने गुरुवार को अपने एक बड़े अफसर यानी डिप्टी कलेक्टर अभिजीत भांडे-पाटिल को सस्पेंड कर दिया। उन पर खुद को भगवान का दूत (गॉडमैन) बताने वाले अशोक खरात के साथ साठगांठ रखने और उसकी मदद करने का बहुत ही गंभीर आरोप लगा है। सरकार ने यह अहम कदम तब उठाया जब शुरुआती जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि एक जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठा अधिकारी ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति के साथ मिला हुआ था।
राजस्व मंत्री ने डिप्टी कलेक्टर को सस्पेंड करने के फैसले पर क्या कहा?
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि पुलिस और विभाग द्वारा जो शुरुआती जांच की गई है, उसमें यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि डिप्टी कलेक्टर भांडे-पाटिल के सीधे संबंध अशोक खरात से हैं। मंत्री ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह अधिकारी पूरी तरह से दोषी नजर आ रहा है। इसलिए उन्होंने भांडे-पाटिल को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने का सख्त फैसला लिया है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले की पूरी जांच खत्म नहीं हो जाती, तब तक भांडे-पाटिल सस्पेंड ही रहेंगे।
सस्पेंड किए गए अधिकारी अभिजीत भांडे-पाटिल की मौजूदा तैनाती कहां थी?
अभिजीत भांडे-पाटिल राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। इसी साल मार्च के महीने में जब इस ढोंगी बाबा का मामला सबसे पहले सामने आया था और विवाद बढ़ा था, तब महाराष्ट्र सरकार ने भांडे-पाटिल को वापस उनके मूल विभाग (पैरेंट डिपार्टमेंट) में भेज दिया था। सरकार की निलंबन की यह गाज गिरने से ठीक पहले, वह मुंबई शहर में झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी या SRA) में डिप्टी कलेक्टर के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
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