राज्यसभा, विधान परिषद चुनाव, बीएमसी जैसे मुद्दों को सुलझाने से पूर्व ही तीनों दल सरकार गठन के फार्मूले पर पहले ही सहमत हो गए हैं। इस फार्मूले के तहत सीएम का पद ढाई-ढाई साल के लिए शिवसेना और एनसीपी को मिलेगा। इसके बदले कांग्रेस को पूरे कार्यकाल के लिए डिप्टी सीएम का पद मिलेगा। कुल 42 मंत्री बनाए जाने और इन पदों को तीन बराबर हिस्सों में बांटने पर सहमति है। हालांकि गृह, वित्त, कृषि जैसे मंत्रालयों पर फैसला अंतिम दौर की बैठक में होगा।
राष्ट्रपति शासन के बीच बन सकती है सरकार
हालांकि महाराष्ट्र में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगा है, मगर इस बीच अगर राज्यपाल के समक्ष बहुमत के लिए जरूरी संख्या बल का दावा करता है तो राज्यपाल सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं।
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के बावजूद सरकार बनाने की कोशिशें जारी हैं। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से एक होटल में करीब एक घंटे तक मुलाकात की। इसके बाद उद्धव ने कहा, सरकार गठन को लेकर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और सही समय आने पर फैसला लिया जाएगा।
हालांकि महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट ने इसे ‘शिष्टाचार मुलाकात’ बताते हुए इसे सकारात्मक कदम करार दिया। कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम अशोक चव्हाण, मानिक राव ठाकरे भी बैठक में शामिल हुए। इससे पहले, बुधवार को एनसीपी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय करने को लेकर पांच सदस्यीय समिति बनाई है।
समिति में विधायक दल के नेता अजीत पवार, प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल, छगन भुजबल, मुंबई इकाई अध्यक्ष नवाब मलिक और धनंजय मुंडे को समिति में शामिल किया है।
शिवसेना नेता संजय राउत को बुधवार को लीलावती अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बाहर आकर वह पुराने रंग में दिखे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। भले ही किसी के साथ मिलकर सरकार बने। जब उनसे कहा गया कि एनसीपी समर्थन देने के लिए मुख्यमंत्री पद के साझे की बात कर रही है तो उन्होंने कहा कि ढाई-ढाई साल की बात होने के बावजूद यह तय है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा।